दिल्ली में आदिवासी संवैधानिक अधिकारों और कानूनी सुरक्षा पर नेशनल कॉन्क्लेव शुरू

राजधानी दिल्ली के स्कोप कॉम्प्लेक्स में 6 अक्टूबर, 2026 को "आदिवासी समुदायों के लिए संवैधानिक अधिकार और कानूनी प्रावधान" विषय पर एक महत्वपूर्ण नेशनल कॉन्क्लेव की शुरुआत हुई। दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन का उद्देश्य आदिवासी समाज को मिलने वाले कानूनी अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करना है। इस सम्मेलन में देश के लगभग 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 75 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए हैं, जिनमें जनजातीय कल्याण और राजस्व विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं।
केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने इस कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों के अनुभवों और बेहतरीन तौर-तरीकों (best practices) को साझा करने का आग्रह किया, ताकि एक-दूसरे के अनुभवों से सीखा जा सके। मंत्री ओराम ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार को व्यावहारिक समाधान और दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए उन अधिकारियों से सीधे फीडबैक लेना जरूरी है, जो जमीन पर आदिवासी समुदायों के बीच काम कर रहे हैं।
डिजिटलीकरण और पारदर्शिता पर जोर
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधन करते हुए जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि सरकारी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और नागरिक-अनुकूल बनाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने फर्जी दावों के खिलाफ कड़े सुरक्षा उपाय करने की आवश्यकता बताई।
वहीं, जनजातीय मामलों की सचिव रंजना चोपड़ा ने बताया कि इस कॉन्क्लेव का मुख्य लक्ष्य संवैधानिक सुरक्षा उपायों को लागू करने में आने वाली आम बाधाओं की पहचान करना है। उन्होंने अधिकारों और सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कुछ प्रमुख सुझाव दिए, जिनमें शामिल हैं:
- रिकॉर्ड्स का पूरी तरह से डिजिटलीकरण करना।
- दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाना।
- ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम लागू करना।
- शिकायत निवारण प्रणाली (grievance redressal) में सुधार लाना।
- अंतर-राज्य सत्यापन तंत्र को और मजबूत करना।