नताशा नरवाल को बड़ी राहत: एकेडमिक कॉन्फ्रेंस के लिए यूके जाने की दिल्ली हाई कोर्ट ने दी इजाजत

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के मामलों में आरोपी नताशा नरवाल को एक बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें अपनी पीएचडी रिसर्च और एक महत्वपूर्ण एकेडमिक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए यूनाइटेड किंगडम (UK) जाने की अनुमति दे दी है। नताशा 2 नवंबर से 1 दिसंबर 2026 के बीच यूके की यात्रा करेंगी, जहां वह अपने पीएचडी सुपरवाइजर से मिलेंगी और यूनिवर्सिटी की वार्षिक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेंगी।
जस्टिस अमित बंसल ने नताशा के वकील अदित एस पुजारी की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। हालांकि, यह अनुमति कुछ सख्त शर्तों के साथ दी गई है, जिसमें उन्हें प्रत्येक मामले में 50,000 रुपये की जमानत राशि (surety) जमा करनी होगी। नताशा वॉरविक यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही हैं और उनका शोध पत्र 'जेंडरड कार्सरल लेबर एज सोशल रिप्रोडक्शन' यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के एसओएस (SOAS) में आयोजित 23वीं वार्षिक हिस्टोरिकल मैटेरियलिज्म कॉन्फ्रेंस के लिए चुना गया है।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट ने पलटा
इससे पहले, 6 अक्टूबर को ट्रायल कोर्ट ने नताशा की इस याचिका को खारिज कर दिया था। निचली अदालत का मानना था कि यूएपीए (UAPA) जैसे गंभीर मामलों की लंबित कार्यवाही के बीच विदेश यात्रा की अनुमति देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इन अपराधों में आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने कहा था कि विदेश यात्रा का अधिकार पूर्ण नहीं होता और मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस मामले की सुनवाई के दौरान एएसजी एस वी राजू और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मधुकर पांडे ने याचिका का कड़ा विरोध किया। सरकारी पक्ष की दलील थी कि यूके के प्रत्यर्पण कानून बहुत सख्त हैं और यदि नताशा वापस नहीं आती हैं या वहां राजनीतिक शरण (asylum) के लिए आवेदन करती हैं, तो उन्हें वापस लाना मुश्किल होगा। साथ ही यह भी कहा गया कि वह पिछले तीन वर्षों से यह कोर्स ऑनलाइन कर रही हैं, इसलिए वहां जाने की कोई खास जरूरत नहीं है। हालांकि, इन तमाम आपत्तियों के बावजूद हाई कोर्ट ने शर्तों के साथ उनकी यात्रा का रास्ता साफ कर दिया।