दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत: दंगों की साजिश मामले की आरोपी नताशा नरवाल को यूके जाने की अनुमति

Kittu Kumari16 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत: दंगों की साजिश मामले की आरोपी नताशा नरवाल को यूके जाने की अनुमति

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 2020 के दिल्ली दंगों की 'बड़ी साजिश' वाले मामले में आरोपी और पीएचडी स्कॉलर नताशा नरवाल को शोध कार्य के लिए यूनाइटेड किंगडम (UK) जाने की अनुमति दे दी है। जस्टिस अमित बंसल की अदालत ने यह आदेश 16 अक्टूबर 2026 को सुनाया, जिसके जरिए उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा पहले दी गई याचिका की खारिज करने वाली याचिका को पलट दिया।

नताशा नरवाल को 2 नवंबर से 1 दिसंबर 2026 तक विदेश यात्रा की अनुमति मिली है, और उन्हें 2 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से भारत वापस लौटना होगा। दरअसल, नताशा लंदन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) में आयोजित होने वाली 23वीं वार्षिक हिस्टोरिकल मैटेरियलिज्म कॉन्फ्रेंस में अपना रिसर्च पेपर 'जेंडरड कार्सरल लेबर एज़ सोशल रिप्रोडक्शन' पेश करना चाहती हैं। इसके अलावा, वह यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में अपने पीएचडी सुपरवाइजर से मिलने और वहां के आर्काइवल मटेरियल का अध्ययन करने जाएंगी, जहां वह 2023 से पीएचडी कर रही हैं।

कड़ी शर्तें और पुलिस का विरोध

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इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कड़ा विरोध जताया था। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मधुकर पांडे ने दलील दी कि ब्रिटेन के प्रत्यर्पण कानून बहुत सख्त हैं और इस बात का खतरा है कि नताशा वहां राजनीतिक उत्पीड़न का दावा कर शरण (asylum) मांग सकती हैं।

हालांकि, कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि विदेश यात्रा के अधिकार को अनिश्चित काल तक नहीं रोका जा सकता, खासकर तब जब मुकदमे लंबे समय से चल रहे हों। कोर्ट ने नताशा के सुपरवाइजर के पत्र को भी अहम माना, जिसमें उनके फिजिकल प्रेजेंटेंस की जरूरत बताई गई थी।

अदालत ने यह अनुमति कई सख्त शर्तों के साथ दी है:

  • नताशा यूके में राजनीतिक शरण के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगी।
  • वह विदेश में रहकर अपने लंबित कानूनी मामलों की मेरिट पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगी।
  • उन्हें 1 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरना होगा।
  • हरियाणा में रहने वाले उनके भाई को बतौर जमानतदार (surety) औपचारिक वचन देना होगा कि वह उनकी वापसी सुनिश्चित करेंगे।
  • वापस आने के 48 घंटों के भीतर उन्हें अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करना होगा।

कोर्ट के इस आदेश के बाद, यात्रा की अवधि के दौरान उनके खिलाफ जारी किसी भी लुक-आउट सर्कुलर (LOC) को निलंबित रखा जाएगा।

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