जामिया विरोध: नसीरुद्दीन शाह ने सरकार को घेरा, खुद को बताया 'दिमागी नक्सल'
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

मशहूर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज में नजर आए हैं। उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के समर्थन में एक वीडियो संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। नसीरुद्दीन शाह ने उन शब्दों का इस्तेमाल किया जो अक्सर आलोचकों के लिए किए जाते हैं और खुद को 'दिमागी नक्सल' करार दिया।
शाह ने वीडियो में कहा कि अगर कोई 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' है, तो वह असल में यह 'अवैध सरकार' ही है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की वर्तमान स्थिति और देश के युवाओं के भविष्य पर गहरी चिंता जताई। अभिनेता का मानना है कि शैक्षिक स्वायत्तता को खत्म किया जा रहा है, जो कि किसी भी लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
जामिया कैंपस में तनाव और छात्रों की मांग
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनावों की बहाली की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब 17वें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह आंदोलन 12 अक्टूबर से शुरू हुआ था। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि छात्र संघ के संविधान की मंजूरी के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे, लेकिन छात्र इस बात से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि चुनाव की एक निश्चित तारीख तय की जाए।
तनाव तब और बढ़ गया जब 26 अक्टूबर को प्रशासन ने गार्ड रूम और गेट नंबर 4 के पास तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए छात्रों को विरोध स्थल खाली करने का नोटिस दिया। प्रशासन ने इस नुकसान के वीडियो भी जारी किए, हालांकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्हें अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं मिली है।
हालात को देखते हुए 27 अक्टूबर को कैंपस के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी गई है। साथ ही, गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन को खाली करने के आदेश दिए गए हैं। यूनिवर्सिटी ने फिलहाल क्लासेस को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट कर दिया है और मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को 8 नवंबर तक के लिए टाल दिया है।
दूसरी ओर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा है कि छात्रों के साथ बातचीत जारी है और कैंपस में कानून-व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए। वहीं, यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों ने चिंता जताई है कि बाहरी राजनीतिक तत्व इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।