नमो भारत की रफ्तार: दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर एक साल में दोगुने हुए यात्री
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। एक साल में यात्रियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।

दिल्ली और मेरठ के बीच चलने वाली नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) ने अपनी रफ्तार और लोकप्रियता से सबको चौंका दिया है। पिछले एक साल में इस कॉरिडोर पर सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में भारी उछाल आया है। आंकड़ों की बात करें तो जुलाई 2025 में जहां रोजाना करीब 47,745 लोग सफर कर रहे थे, वहीं जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर 94,936 हो गई है, यानी यात्रियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।
अक्टूबर 2023 में जब इस सिस्टम के पहले हिस्से का उद्घाटन हुआ था, तब से अब तक करीब 4.5 करोड़ से ज्यादा यात्री इसका सफर कर चुके हैं। 1 अक्टूबर 2026 तक कुल यात्री यात्राओं की संख्या 4,56,52,748 तक पहुंच गई है। वर्तमान में तो यह आंकड़ा और भी बेहतर है और रोजाना 1.1 लाख से ज्यादा यात्री नमो भारत की सवारी कर रहे हैं।
पूरा कॉरिडोर चालू होने से बढ़ा क्रेज
इस तेजी का मुख्य कारण फरवरी 2026 में पूरे 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का पूरी तरह चालू होना है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया था। इसके बाद यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा देखा गया। फरवरी 2026 में औसत दैनिक सवारी 63,999 थी, जो मार्च में 87,682 और मई तक 93,877 पहुंच गई। जून 2026 में पहली बार यह आंकड़ा एक लाख के पार (1.02 लाख) पहुंचा। वहीं, 28 अगस्त 2026 को सबसे ज्यादा 1,68,510 यात्रियों ने एक ही दिन में सफर किया।
हाल ही में 'नमो भारत दिवस 2026' के अवसर पर केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि 4.5 करोड़ यात्राएं सुरक्षित और सहज परिवहन पर जनता के भरोसे को दर्शाती हैं। उन्होंने जोर दिया कि ऐसा बुनियादी ढांचा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को तेज करता है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी शामिल हुए।
NCRTC के अधिकारियों का मानना है कि इस ग्रोथ की बड़ी वजह दिल्ली मेट्रो, भारतीय रेलवे, अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों (ISBT) और सिटी बस नेटवर्क के साथ बेहतर तालमेल है। साथ ही, 'लास्ट माइल कनेक्टिविटी' में सुधार ने भी यात्रियों को आकर्षित किया है।
भविष्य की योजनाओं की बात करें तो सरकार अब दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-गुरुग्राम-बहरोर जैसे दो और कॉरिडोर पर विचार कर रही है। इसके अलावा गाजियाबाद-जेवर और नोएडा-फरीदाबाद-गुरुग्राम रूट के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (DPR) तैयार की जा रही हैं।