दिल्ली वोटर लिस्ट विवाद: मुस्लिम मतदाताओं के नामों को ज्यादा 'फ्लैग' करने का दावा, मचा बवाल

Kittu Kumari13 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली वोटर लिस्ट विवाद: मुस्लिम मतदाताओं के नामों को ज्यादा 'फ्लैग' करने का दावा, मचा बवाल

देश में वोटर लिस्ट के रिवीजन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग के ERONET सॉफ्टवेयर के डेटा से यह संकेत मिले हैं कि दिल्ली में विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मुस्लिम मतदाताओं को अनुपात से अधिक 'फ्लैग' किया गया है। इस खुलासे के बाद अब राजनीतिक गलियारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक बहस छिड़ गई है कि क्या यह प्रक्रिया निष्पक्ष है या इसमें किसी तरह का सिस्टमैटिक बायस है।

आंकड़ों की बात करें तो दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी 13.6% है, लेकिन 'लॉजिकल विसंगतियों' (logical discrepancies) के आधार पर फ्लैग किए गए लोगों में उनकी संख्या 20.3% है। इतना ही नहीं, परिवार के आकार से जुड़ी पांच विशिष्ट श्रेणियों में पहचाने गए लोगों में यह आंकड़ा 30% तक पहुंच गया है। वहीं बिहार की स्थिति अलग है, जहां लॉजिकल विसंगतियों की जांच नहीं हुई और वहां हटाए गए मतदाताओं में मुस्लिमों की संख्या 18.4% थी, जो उनकी कुल आबादी (17.7%) के लगभग बराबर है।

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इस पूरे मामले ने अब अंतरराष्ट्रीय तूल पकड़ लिया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के तीन मानवाधिकार विशेषज्ञों—निकोलस लेव्राट, आइरीन खान और नाज़िला घनेआ—ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और अल्पसंख्यकों के मताधिकार छीनने के आरोपों पर जवाब देने का औपचारिक अनुरोध किया है। ERONET में एआई (AI) आधारित सिस्टम के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

विवाद इतना बढ़ गया है कि हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस.वाई. कुरैशी ने भी इस बड़े पैमाने पर नामों को हटाने की प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें 'गुड फेथ' यानी नेकनीयती की कमी दिखती है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के समर्थन वाली चुनाव आयोग (ECI) ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाना एक मानक प्रक्रिया है, ताकि डुप्लिकेट, मृत या शिफ्ट हो चुके मतदाताओं को हटाया जा सके। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वोटर लिस्ट में किसी की धार्मिक पहचान दर्ज नहीं होती और बिना उचित प्रक्रिया के किसी भी मतदाता को स्थायी रूप से नहीं हटाया जाता है।

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