लोकतंत्र संविधान के दायरे में चले, निष्पक्ष हों चुनाव: मुरली मनोहर जोशी

भारतीय राजनीति के दिग्गज और पूर्व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र तभी जीवित रह सकता है जब चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष हों, सरकारें जनता के प्रति जवाबदेह हों और नौकरशाही में पारदर्शिता बनी रहे। जोशी ने यह बात उस समय कही जब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
मुरली मनोहर जोशी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध शब्दों को याद करते हुए कहा कि "जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा संचालित सरकार" दुनिया से तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक कुछ बुनियादी लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल सरकार का होना काफी नहीं है, बल्कि विपक्ष का भी जिम्मेदार और responsive होना जरूरी है और उनके पास एक स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम होना चाहिए।
संविधान का उल्लंघन हुआ तो सुप्रीम कोर्ट करे हस्तक्षेप
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की मर्यादा पर बात करते हुए जोशी ने कहा कि हर कदम संविधान के ढांचे के भीतर ही उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में होनी चाहिए। यदि कहीं भी संविधान का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। लोकतंत्र को इसी सिद्धांत पर काम करना चाहिए।"
वहीं, इस दौरान नीति आयोग के सदस्य आर. बालसुब्रमण्यम ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणालियों और शास्त्रों में छिपी बुद्धिमत्ता आज की दुनिया के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है। उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भगवद गीता के 'प्रणिपात, परिप्रश्न और सेवा' जैसे मूल्यों और 'पराविविद्या' व 'अपराविद्या' की अवधारणाओं से परिचित कराना चाहिए, ताकि वे समाज में बेहतर योगदान दे सकें।