सत्या निकेतन पीजी हादसे के बाद जर्जर और अवैध इमारतों पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई

दिल्ली के सत्या निकेतन में पीजी ढहने की घटना के बाद दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और चेन्नई में नगरपालिका अधिकारियों ने जर्जर इमारतों और अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस घटना को محض दुर्घटना नहीं बल्कि भारी लापरवाही और आपराधिक कृत्य बताया है और अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 तय की है। अदालत ने छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है।
दिल्ली में, नगर निगम (MCD) ने अपने 12 जोनों में कार्रवाई तेज कर दी है। 1 जून से 9 सितंबर 2026 के बीच एमसीडी ने 1,053 विध्वंस कार्रवाई की, 491 संपत्तियों को सील किया और 2,316 कारण बताओ नोटिस जारी किए। हाल ही में 21 सितंबर 2026 को एमसीडी ने 44 विध्वंस अभियान चलाए और 11 संपत्तियों को सील किया। सत्या निकेतन की घटना के बाद चिन्हित 51 खतरनाक इमारतों में से 27 को तोड़ने और 7 को सील करने का आदेश दिया गया है। अधिकारी लगभग 24,000 लोगों को आवास देने वाले 1,243 पीजी भवनों का ऑडिट कर रहे हैं। इसके अलावा, दिल्ली सरकार पुराने स्कूल भवनों का structural audit कर रही है, जिसमें 108 में से 54 संरचनाएं जर्जर पाई गई हैं और विध्वंस की प्रक्रिया जारी है। पीजी, नर्सिंग होम और स्कूलों के लिए structural audit और सुरक्षा प्रमाण पत्र अनिवार्य करने हेतु एक नई नीति तैयार की जा रही है।
नोएडा में, नोएडा प्राधिकरण ने 10 कार्य सर्किलों के तहत 81 गांवों में व्यापक सर्वेक्षण शुरू किया है। सदरपुर, निठारी, मामूरा, सलारपुर और भंगेर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में चिन्हित 56 असुरक्षित इमारतों के कब्जेदारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिसमें 7 से 14 दिनों के भीतर खाली करने का आदेश दिया गया है। विशेष रूप से, सेक्टर 27 में 207 आवास इकाइयां, जिन्हें 2025 में आईआईटी रुड़की द्वारा संरचनात्मक रूप से असुरक्षित चिह्नित किया गया था, अब तीसरे दौर के नोटिस का सामना कर रही हैं। प्राधिकरण संरचनात्मक ऑडिट नीतियों को सुव्यवस्थित करने के लिए 10 निजी एजेंसियों का एक पैनल भी स्थापित कर रहा है।
गाजियाबाद नगर निगम ने 129 इमारतों को असुरक्षित घोषित किया है, हालांकि कर्मचारियों की कमी के कारण प्रवर्तन कार्य अभी नोटिस के स्तर पर अटका हुआ है। इस बीच, चेन्नई में अप्रैल 2023 में 70 साल पुरानी इमारत के ढहने जैसी ऐतिहासिक घटनाओं के बाद पुरानी शहरी संरचनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। सभी क्षेत्रों के अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि किसी भी अन्य दुर्घटना की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी उन संपत्ति मालिकों और निवासियों की होगी जो आधिकारिक नोटिस मिलने के बाद भी असुरक्षित घोषित इमारतों को खाली करने में विफल रहते हैं।