Mumbai और NCR में घटा घरों का Affordability, होम लोन सस्ते होने के बाद भी खरीदारों के सामने बढ़ी मुश्किलें

भारत के रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में अलग-अलग रुझान देखने को मिल रहे हैं। कई शहरों में होम लोन सस्ता होने से खरीदार खुश हैं, लेकिन मुंबई और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में affordability यानी affordability एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस बात की जानकारी ANI News India द्वारा हाइलाइट की गई रियल एस्टेट डेवलपर NBR Group की 1 अगस्त 2026 की मार्केट आउटलुक रिपोर्ट में सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) देश का सबसे कम affordable रेजिडेंशियल मार्केट बना हुआ है।
- NCR का affordability रेशियो 2025 के 66% से थोड़ा बढ़कर 67% हो गया है।
- देश के आठ बड़े शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग सप्लाई 2018 के लगभग 52% से घटकर 2026 तक केवल 15% रह गई है।
- लग्जरी घरों (₹1 करोड़ और उससे अधिक कीमत वाले) की हिस्सेदारी 14% से बढ़कर 62% से अधिक हो गई है।
- RBI द्वारा 2026 की पहली छमाही में repo rate में 125 basis points की कटौती की गई है।
मुंबई और NCR में घटी घरों की Affordability
Knight Frank India के 3 जुलाई 2026 के लेटेस्ट Affordability Index के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) देश का सबसे कम affordable रेजिडेंशियल मार्केट बना हुआ है, जहाँ एक आम होमबायर को अपनी मंथली इनकम का 69% हिस्सा लोन चुकाने में खर्च करना पड़ता है। इसके अलावा NCR का affordability रेशियो भी 2025 के 66% से थोड़ा बढ़कर 67% हो गया है। ये दोनों क्षेत्र 50% के affordability बेंचमार्क से काफी ज्यादा हैं, जो एक ऐसा स्तर है जिसके बाद आमतौर पर बैंक हाउसिंग लोन देने में हिचकिचाते हैं। दिल्ली-NCR में किफायती घरों की सप्लाई में भारी गिरावट आई है, जो 2020 में नए लॉन्च का 62% थी और 2025 की पहली छमाही में गिरकर केवल 5% रह गई। इसी तरह, भारत के आठ सबसे बड़े शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग सप्लाई 2018 के लगभग 52% से घटकर 2026 तक सिर्फ 15% रह गई है, जबकि बढ़ती जमीन और निर्माण लागत के कारण लग्जरी होम (₹1 करोड़ और उससे अधिक कीमत वाले) 14% से बढ़कर 62% से अधिक हो गए हैं।
अन्य शहरों में सस्ता होम लोन और सुधरी डिमांड
इसके विपरीत, देश के अन्य हिस्सों को 2026 की पहली छमाही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेपो रेट में की गई कुल 125 basis points की कटौती का फायदा मिला है, जिससे होम लोन सस्ते हो गए हैं और हाउसिंग डिमांड बढ़ी है। उधार लेने की लागत में इस कमी के कारण भारत के शीर्ष आठ हाउसिंग मार्केट में से छह में affordability स्थिर बनी रही, और 2026 की पहली छमाही में ये सभी 50% के affordability threshold से नीचे रहे। RBI ने अपनी फरवरी और जून 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी बैठकों में पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखा है, जो निकट अवधि में दरों की स्थिरता का संकेत देता है।