सोशल मीडिया पर भ्रामक कंटेंट को लेबल करेगा प्लेटफॉर्म, MeitY ने जारी किए सख्त निर्देश

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। अब सभी सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद भ्रामक (misleading) और मैनिपुलेटेड कंटेंट को तुरंत फ्लैग और लेबल करना होगा। 8 अक्टूबर 2026 को जारी इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखना और गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकना है।
संयुक्त सचिव अजीत कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस दस्तावेज के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स को अब सरकार की शिकायतों को प्राथमिकता देनी होगी, खासकर संवेदनशील सार्वजनिक आयोजनों के दौरान। हालांकि मंत्रालय ने इस एडवाइजरी का टेक्स्ट सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए इसकी विस्तृत जानकारी सामने आई है।
प्लेटफॉर्म्स के लिए क्या हैं 5 मुख्य शर्तें?
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों के लिए पांच प्रमुख परिचालन आवश्यकताएं तय की हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा:
- अवैध सूचनाओं पर रोक: 2021 के आईटी नियमों के तहत परिभाषित किसी भी गैर-कानूनी जानकारी की पहचान करना और उसे बढ़ावा देने से रोकना।
- सरकारी रिपोर्ट को प्राथमिकता: सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करने वाले कंटेंट के संबंध में अधिकृत सरकारी एजेंसियों से मिलने वाली रिपोर्ट पर तुरंत कार्रवाई करना।
- कंटेंट लेबलिंग: कृत्रिम रूप से तैयार किए गए (synthetically generated), बदले हुए या भ्रामक कंटेंट को, जिसे असली बताया गया हो, स्पष्ट रूप से लेबल करना या उसका संदर्भ देना।
- यूजर जागरूकता: ऐसे फीचर्स लागू करना जिससे यूजर्स खुद कंटेंट के स्रोत और तारीख की पुष्टि कर सकें।
- कानूनी सहयोग: कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सरकारी निकायों के साथ निर्धारित कानूनी समय सीमा के भीतर पूरा सहयोग करना।
दिलचस्प बात यह है कि इस दस्तावेज में कुछ प्रशासनिक खामियां भी दिखी हैं, जैसे कि क्लॉज (iv) के बाद सीधे क्लॉज (vi) आ गया है। साथ ही, 'अधिकृत सरकारी एजेंसी' की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है और न ही निर्देशों की अनदेखी करने पर किसी विशेष जुर्माने का जिक्र है।
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन की योजना है। नागरिक समाज समूहों और इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने इस एडवाइजरी पर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान और संसदीय निगरानी के जारी किया गया यह आदेश वैध चर्चाओं की सेंसरशिप का कारण बन सकता है।
वहीं, आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सुरक्षा और डीपफेक्स पर एक अलग परामर्श पत्र (consultation paper) अगले एक महीने में आएगा। वर्तमान एडवाइजरी एक तत्काल आदेश है, जबकि आगामी पेपर एक प्रस्तावित नियामक प्रक्रिया का हिस्सा होगा।