मेडिकल गुड्स सप्लाई घोटाला: आरोपी राजीव रंगीला की जमानत याचिका दिल्ली कोर्ट ने की खारिज

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 840 करोड़ रुपये के मेडिकल गुड्स सप्लाई घोटाले के आरोपी राजीव रंगीला की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

Kittu Kumari4 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
मेडिकल गुड्स सप्लाई घोटाला: आरोपी राजीव रंगीला की जमानत याचिका दिल्ली कोर्ट ने की खारिज

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय (DGHS) में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले के आरोपी राजीव कुमार उर्फ राजीव रंगीला को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने भ्रष्टाचार के इस गंभीर मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी का हिरासत में रहना जरूरी है। यह पूरा मामला दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग को बेहद महंगी दरों पर मेडिकल सामान की सप्लाई से जुड़ा है, जिसमें करीब 840 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है।

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद में भारी अनियमितता बरती गई। आरोप है कि 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें, जिनकी कीमत करीब 14.92 लाख रुपये प्रति मशीन होनी चाहिए थी, उन्हें 38 लाख रुपये प्रति मशीन की exorbitant (अत्यधिक) कीमत पर खरीदा गया। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने इस मामले में पूर्व महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल और डॉ. विनोद कुमार रंगा समेत तीन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

अमेरिका भागने और फर्जी कंपनियों के जाल का खुलासा

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

विशेष न्यायाधीश (ACB) विद्या प्रकाश ने राजीव रंगीला की भूमिका, अपराध की गंभीरता और चल रही जांच को देखते हुए जमानत याचिका खारिज की। कोर्ट ने पाया कि रंगीला न केवल इस घोटाले में शामिल था, बल्कि वह जांच से बचने के लिए अमेरिका भी भाग गया था, जिसके बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया था।

जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि राजीव रंगीला ने मेडिकल सामान निर्माताओं के साथ मिलकर रेट तय किए और कैश किकबैक (रिश्वत) का खेल खेला। इतना ही नहीं, उसने फर्जी मालिकों के नाम पर कई फर्जी कंपनियां बनाई थीं, जिनमें M/s F Med Devices, Technocrats, Raj Shree, Aashi Surgical and Pharmaceuticals और M Sahib and Sons Pvt. Ltd. शामिल हैं। कागजों पर ये कंपनियां दूसरों की थीं, लेकिन असल में इनका संचालन और मालिकाना हक रंगीला का ही था।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि अभी वित्तीय लेनदेन की जांच, दस्तावेजी सबूतों का विश्लेषण और अन्य संदिग्ध संस्थाओं की भूमिका की पड़ताल बाकी है, इसलिए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा। मामले में पूरक चार्जशीट दाखिल की जानी है, जिसके लिए आरोपी की कस्टडी आवश्यक है।

Share:

Comments

Leave a comment