दिल्ली में सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एमसीआईएम सदस्य और सपा सांसद हिरासत में लिए गए

नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेंद्र कुमार और धार्मिक संरचनाओं के विवादों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मॉनिटरिंग कमेटी ऑफ इंडियन मुस्लिम (एमसीआईएम) के सदस्यों और समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। प्रदर्शन के दौरान विरोध जताते हुए सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने कहा कि हम आखिरी सांस तक न्याय के लिए लड़ते रहेंगे। वहीं सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने आरोप लगाया कि देश के संस्थानों पर एक विशेष विचारधारा के लोगों का कब्जा हो गया है, जिससे देश में अशांति फैल रही है।
देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दल लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में दिल्ली में चुनाव आयोग के बाहर प्रदर्शन के दौरान वाम दलों के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी को भी हिरासत में लिया गया। पांच वाम दलों ने सीईसी को हटाने और एसआईआर पर रोक लगाने की मांग को लेकर 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है, क्योंकि उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया नागरिकों के मतदान के अधिकारों को खतरे में डालती है।
दूसरी ओर चुनाव आयोग का यह कहना है कि एसआईआर का यह अभ्यास मतदाता सूचियों की सटीकता सुनिश्चित करने और पात्र मतदाताओं की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए है। इस बीच कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक नई दिल्ली में हुई, जिसमें कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग पर चुनावी धांधली के आरोप लगाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चार मांगें रखीं, जिसमें सीईसी का इस्तीफा, एसआईआर का निलंबन, हटाए गए 13 करोड़ से अधिक नाम बहाल करना और प्रधानमंत्री व गृह मंत्री का इस्तीफा शामिल है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है, जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े फैसलों पर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां उठाई थीं। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को संस्थागत असहमति मानने से इनकार करते हुए कहा है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे।