दिल्ली में प्रदूषण पर वार: MCD ने तैयार किया विंटर एक्शन प्लान, निर्माण कार्यों पर रहेगी कड़ी नजर

राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दियों के आते ही हवा जहरीली होने लगती है। इस बार इस समस्या से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने एक व्यापक दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण योजना का ऐलान किया है। 7 अक्टूबर 2026 को घोषित इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर की हवा को साफ रखना और धूल के स्तर को कम करना है। MCD की यह कोशिश केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सड़कों की मरम्मत, सफाई और हरियाली बढ़ाने जैसे दीर्घकालिक उपायों पर जोर दिया गया है।
MCD की स्थायी समिति की चेयरपर्सन सत्य शर्मा ने बताया कि निगम इस बार सड़क रखरखाव और प्रवर्तन (enforcement) के जरिए प्रदूषण पर लगाम लगाएगा। धूल को नियंत्रित करने के लिए फिलहाल 66 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें काम कर रही हैं, जो रोजाना करीब 180 टन धूल इकट्ठा करती हैं। इसे और मजबूत करने के लिए 70 और मशीनों का प्रस्ताव है। इसके अलावा, सड़कों पर 167 वाटर स्प्रिंकलर और 28 मोबाइल एंटी-स्मॉग गन तैनात किए गए हैं। निर्माण स्थलों, डंपसाइट्स और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट पर भी एंटी-स्मॉग गन लगाए गए हैं, जबकि ऊंची इमारतों पर 15 एंटी-स्मॉग गन तैनात हैं।
सड़कों की मरम्मत और हरियाली पर विशेष जोर
प्रदूषण कम करने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार भी किया जा रहा है। इस साल 1,202 किलोमीटर सड़कों को कवर किया जा रहा है, जिसमें अप्रैल से अगस्त के बीच 6,797 गड्ढों की मरम्मत की गई है। वैज्ञानिक तरीके से गड्ढे भरने के लिए CSIR-CRRI द्वारा विकसित 'इकोफिक्स' (Ecofix) सामग्री के 12,500 बैग खरीदे गए हैं। साथ ही, 18 मई से शुरू हुए 'डीप क्लीनिंग ड्राइव' के तहत अब तक करीब 2,900 मीट्रिक टन गाद (silt) निकाली जा चुकी है। पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए अप्रैल से अगस्त के बीच 4 लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं, जिनमें पेड़, झाड़ियाँ और बांस शामिल हैं।
दिल्ली सरकार के व्यापक विंटर एक्शन प्लान के तहत आम जनता और कार्यालयों के लिए भी कुछ कड़े नियम लागू होंगे:
- पार्किंग शुल्क: 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक पार्किंग फीस दोगुनी कर दी जाएगी।
- वर्क फ्रॉम होम: सरकारी कार्यालयों में काम के घंटों में बदलाव होगा और 50% वर्क-फ्रॉम-होम की नीति अपनाई जाएगी।
- निर्माण कार्य पर रोक: धूल पैदा करने वाले निर्माण कार्यों पर 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक पाबंदी रहेगी। वहीं, 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक सभी निर्माण और विध्वंस कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध होगा।
निगरानी के लिए दिल्ली के 11 राजस्व जिलों में संयुक्त प्रवर्तन टीमें और नोडल अधिकारी तैनात किए जाएंगे। ये टीमें विशेष रूप से DPCC द्वारा चिह्नित 46 प्रदूषण हॉटस्पॉट्स पर नजर रखेंगी। बायोमास जलाने, अवैध रूप से निर्माण कचरा फेंकने और अनधिकृत ईंधन के इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।