MCD ने ओखला लैंडफिल साइट पर वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स तेज किए, 2026 तक कचरा साफ करने का लक्ष्य

Kittu Kumari6 August 20262 min read48 viewsDelhi Local
MCD ने ओखला लैंडफिल साइट पर वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स तेज किए, 2026 तक कचरा साफ करने का लक्ष्य

दिल्ली में म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) ओखला लैंडफिल साइट पर वेस्ट मैनेजमेंट के काम में तेजी ला रहा है। MCD कमिश्नर संजीव खिड़वार ने 5 अगस्त 2026 को बायो-माइनिंग के चल रहे कामों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को बचे हुए कचरे की प्रोसेसिंग और डिस्पोजल में तेजी लाने के निर्देश दिए। इस काम में दो नए प्लांट अहम हैं, जिसमें 1,400 टन रोजाना क्षमता वाला वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है और एक कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन (C&D) वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट नवंबर 2026 तक पूरा किया जाना है। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद कचरे के ट्रीटमेंट और डिस्पोजल की रफ्तार को काफी बढ़ाना है।

ओखला लैंडफिल साइट पर कचरे की स्थिति और नया टारगेट


2 अगस्त 2026 तक ओखला लैंडफिल में जमा हुए लगभग 84 लाख मीट्रिक टन (MT) पुराने कचरे को बायो-माइनिंग और बायो-रेमीडिएशन के जरिए साफ कर दिया गया है। MCD अब पिछले डेढ़ साल में पैदा हुए 15 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त कचरे को अक्टूबर 2026 तक साफ करने का टारगेट बना रहा है। इन सुधार के कामों के बावजूद इस साइट पर रोजाना औसतन 3,500 मीट्रिक टन ताजा कचरा मिल रहा है। कमिश्नर खिड़वार ने अधिकारियों को भारी गाड़ियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए लैंडफिल के रास्ते की सड़क को पक्का करने का निर्देश भी दिया। न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओखला डंपसाइट को साफ करने की मौजूदा समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 है, जिसे 2019 के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश पर तय किए गए शुरुआती साल 2023 के बाद से कई बार बढ़ाया जा चुका है (Source: PTI News)।

प्रोजेक्ट की प्रगति और नए नियम


MCD कमिश्नर संजीव खिड़वार ने इस प्रगति पर संतोष जताया और अधिकारियों से बचे हुए पुराने कचरे को तेजी से साफ करने को कहा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुष्टि की कि ओखला में कचरा ट्रीटमेंट की बढ़ी हुई दरों की वजह से 2025 तक का सारा पुराना कचरा साफ हो चुका है। आगे की प्लानिंग के तहत, मार्च 2027 तक ओखला वेस्ट-टू-एनर्जी (WtE) प्लांट की क्षमता में प्रति दिन 1,000 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की योजना है, जिसके लिए दिल्ली सरकार ने वायबिलिटी गैप फंडिंग के रूप में 50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। ये पहल नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के मुताबिक हैं, जो कचरे को चार कैटेगरी (गीला, सूखा, सैनिटरी और स्पेशल-केयर वेस्ट) में अलग करने पर जोर देते हैं।

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