दिल्ली में जानवरों के हमलों में 5 गुना उछाल, MCD खरीदेगी दो साल की वैक्सीन

Kittu Kumari18 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में जानवरों के हमलों में 5 गुना उछाल, MCD खरीदेगी दो साल की वैक्सीन

राजधानी दिल्ली में आवारा जानवरों, खासकर कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पिछले चार सालों में इन हमलों में करीब पांच गुना की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) अब एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। निगम ने तय किया है कि वह आने वाले दो सालों के लिए एंटी-रेबीज वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक जमा करेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके।

हाल ही में संगम विहार और वजीराबाद इलाकों में एक 18 महीने के मासूम बच्चे पर हुए भीषण हमले ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इलाके के दस आवारा कुत्तों को पकड़ा था। हालांकि, निगम लगातार टीकाकरण और नसबंदी पर जोर दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के पहले छह महीनों में ही 52,457 कुत्तों का टीकाकरण किया गया और 49,424 की नसबंदी की गई।

हाई कोर्ट की सख्ती और नए शेल्टर होम की तैयारी

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इस पूरे मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से रेबीज उन्मूलन कार्ययोजना पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और MCD व NDMC को निर्देश दिया है कि वे कम से कम एक वार्ड को पूरी तरह 'रेबीज मुक्त' बनाकर दिखाएं। प्रशासन अब एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों 2023 और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन कर रहा है, जिसके तहत कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद ही उन्हें छोड़ा जाता है।

जगह की कमी एक बड़ी चुनौती रही है, जिसके कारण पकड़े गए जानवरों को प्रक्रिया के बाद केवल 15 दिनों तक रखा जा सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए द्वारका के सेक्टर 29 में GMR वरलक्ष्मी फाउंडेशन के सहयोग से एक नया डॉग शेल्टर बनाया जा रहा है, जो दिसंबर 2026 तक शुरू हो जाएगा। यहाँ खासकर आक्रामक जानवरों को रखा जा सकेगा।

MCD अधिकारियों का कहना है कि टीकाकरण और नसबंदी अभियान की सफलता के लिए स्थानीय निवासियों, डॉग फीडर्स और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) का सहयोग बेहद जरूरी है। इसी कड़ी में अमर कॉलोनी जैसे इलाकों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नसबंदी कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। हालांकि, पशु चिकित्सा सेवाओं के निदेशक (Director of Veterinary Services) का पद पिछले कई महीनों से खाली पड़ा है, जिससे प्रबंधन में कुछ मुश्किलें आ रही हैं।

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