दिल्ली बॉर्डर पर जाम से मिलेगी राहत, MCD लागू कर रहा है फ्री-फ्लो टोल सिस्टम
MCD दिल्ली के बॉर्डर पॉइंट्स पर मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोल सिस्टम लागू कर रहा है, जिससे कमर्शियल वाहनों को बिना रुके निकल सकेंगे।

दिल्ली के बॉर्डर पॉइंट्स पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से अब निजात मिलने वाली है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर के प्रवेश द्वारों पर भीड़भाड़ को कम करने के लिए मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (MLFF) टोल सिस्टम लगाने का काम शुरू कर दिया है। इस नई तकनीक के आने के बाद अब कमर्शियल वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे समय की बचत होगी और ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में कुल 20 टोल प्लाजा पर यह सिस्टम लगाया जा रहा है, जिनमें से 12 नेशनल हाईवे पर स्थित हैं। उम्मीद है कि अगले महीने से यह पूरी तरह काम करना शुरू कर देगा। MCD का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक दिल्ली के सभी 154 बॉर्डर एंट्री पॉइंट्स को इस आधुनिक सिस्टम के दायरे में लाना है।
FASTag और ANPR तकनीक से होगा भुगतान
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें RFID-आधारित FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब है कि जब कोई कमर्शियल वाहन टोल से गुजरेगा, तो टोल की राशि अपने आप कट जाएगी और गाड़ी को रुकने की जरूरत नहीं होगी।
टोल दरों की बात करें तो हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए यह ₹100 से शुरू होकर भारी मल्टी-एक्सल ट्रकों के लिए ₹2,000 तक होगी। निगम को हर साल टोल दरों में 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का अधिकार भी दिया गया है।
नियमों को सख्त बनाने के लिए MCD ने दिल्ली नगर निगम (टोल टैक्स) उप-नियमों में बदलाव किए हैं। अगर कोई वाहन टोल चुकाए बिना निकलता है, तो उसे SMS या ईमेल के जरिए नोटिस भेजा जाएगा। बकाया राशि भरने के लिए 72 घंटे का समय दिया जाएगा। यदि फिर भी भुगतान नहीं हुआ, तो मूल राशि से पांच गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है, और वाहन को जब्त करने या इलेक्ट्रॉनिक वारंट जारी करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
हालांकि, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस जैसी आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं को इस टोल टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है।
वहीं, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने स्थानीय निवासियों के लिए भी सुविधा दी है। नेशनल हाईवे टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोग ₹1,500 या ₹3,000 का वार्षिक लोकल पास ले सकते हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, AI-आधारित इस मैनेजमेंट सिस्टम को 2026 के अंत तक पूरे देश में लागू किया जाएगा, ताकि मार्च 2027 तक नेशनल हाईवे पूरी तरह बैरियर-मुक्त हो सकें।