दिल्ली के 20 एंट्री पॉइंट्स पर लगेगा फ्री फ्लो टोल सिस्टम, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
MCD दिल्ली के 20 एंट्री पॉइंट्स पर मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोल सिस्टम लागू करेगा, जिससे ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत।

दिल्ली की सड़कों पर कमर्शियल वाहनों की वजह से लगने वाले लंबे जाम से अब जल्द छुटकारा मिल सकता है। दिल्ली नगर निगम (MCD) शहर के 20 प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (MLFF) टोल सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से वाहनों को टोल चुकाने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे यातायात का प्रवाह बना रहेगा।
इस प्रोजेक्ट का काम कई अहम जगहों पर शुरू हो चुका है, जिनमें गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर शामिल हैं। उम्मीद है कि यह सिस्टम नवंबर 2026 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा। शुरुआत में इसे 20 टोल पॉइंट्स पर लगाया जा रहा है, जिनमें से 12 नेशनल हाईवे पर स्थित हैं। डिप्टी कमिश्नर (टोल) सुमित कुमार के मुताबिक, भविष्य में इस तकनीक का विस्तार MCD के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 156 टोल लोकेशन्स तक किया जाएगा।
बिना रुके कटेगा टोल, हाई-टेक कैमरों से होगी निगरानी
30 अक्टूबर 2026 को MCD की स्थायी समिति की चेयरपर्सन सत्य शर्मा ने 126 टोल पॉइंट्स पर मौजूदा RFID इंफ्रास्ट्रक्चर को MLFF तकनीक में अपग्रेड करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह पूरा प्रोजेक्ट छह साल के लिए होगा, जिसमें पहले छह महीने डिजाइन और कार्यान्वयन के होंगे और अगले 54 महीनों तक इसका संचालन और रखरखाव किया जाएगा।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले वाहनों के RFID टैग को भी पहचान सकता है। इसमें गैन्ट्री-माउंटेड RFID रीडर्स, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और रडार उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे टोल टैक्स और एनवायरमेंटल कंपनसेशन चार्ज (ECC) की वसूली बिना वाहन रोके हो जाएगी।
प्रोजेक्ट की वित्तीय बारीकियों की बात करें तो 'सहकार ग्लोबल' नामक कॉन्ट्रैक्टर करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से इसे इंस्टॉल करेगा। वहीं, MCD को इस कॉन्ट्रैक्ट से सालाना 964 करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद है। जब तक यह सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होता, तब तक मौजूदा RFID सिस्टम से ही वसूली जारी रहेगी और भुगतान न करने वालों को डिजिटल नोटिस भेजे जाएंगे।
यह कदम जून 2026 में पारित दिल्ली नगर निगम (टोल टैक्स) संशोधन उप-नियमों के बाद उठाया गया है, जो डिजिटल चालान और टोल चोरी की रिकवरी को कानूनी आधार प्रदान करता है। साथ ही, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के विजन के अनुरूप भारत के सभी नेशनल हाईवे टोल बूथों को मार्च 2027 तक बैरियर-फ्री मॉडल में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।