धूल प्रदूषण पर वार: दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगी 70 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें
दिल्ली की सड़कों से धूल हटाने के लिए MCD 70 नई मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें तैनात करेगी। जानिए इस बड़े प्रदूषण नियंत्रण अभियान की पूरी डिटेल।

राजधानी दिल्ली में बढ़ते धूल प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने कमर कस ली है। शहर की सड़कों को साफ रखने और हवा में उड़ती धूल को कम करने के लिए MCD अब 70 नई मैकेनिकल रोड-स्वीपिंग मशीनें तैनात करने जा रही है। यह कदम दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है, जिसके तहत सड़कों, फुटपाथों और डिवाइडरों पर जमी धूल को आधुनिक मशीनों के जरिए हटाया जाएगा।
इन मशीनों की खासियत यह है कि इनमें से 55 मशीनें इलेक्ट्रिक हैं और 15 सीएनजी से संचालित होंगी। यूरोप से आयात की गई इन मशीनों की क्षमता दो और चार क्यूबिक मीटर है। साथ ही, मलबे और कचरे को बेहतर तरीके से साफ करने के लिए इनमें एक अतिरिक्त तीसरा फ्रंट ब्रश लगाया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव के लिए अगले 10 वर्षों में करीब 923.57 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च किया जाएगा।
विंटर एक्शन प्लान और व्यापक तैयारी
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के सहयोग से शुरू किए गए इस अभियान की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। MCD कमिश्नर संजीव खिरवार ने 1 अक्टूबर 2026 को इन मशीनों का फील्ड ट्रायल खुद सुपरवाइज किया, जिसके बाद इन्हें नवंबर के मध्य तक पूरी तरह तैनात कर दिया जाएगा। यह पूरी कवायद 'विंटर एक्शन प्लान 2026-27' का हिस्सा है, जिसके तहत शहर के 250 वार्डों की लगभग 609 किलोमीटर लंबी 854 छोटी सड़कों पर सफाई अभियान चलाया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल मशीनें ही नहीं, बल्कि अन्य इंतजाम भी किए गए हैं:
- निगरानी: 125 कंस्ट्रक्शन डेब्रिस कलेक्शन साइट्स पर 360-डिग्री सर्विलांस कैमरे लगाए गए हैं।
- अन्य संसाधन: वर्तमान में 167 वॉटर स्प्रिंकलिंग वाहन और 40 एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- विशेष साझेदारी: दिल्ली कैबिनेट ने 393.73 करोड़ रुपये के एक अलग प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें 30 इलेक्ट्रिक स्वीपर्स और IIT दिल्ली के साथ मिलकर 24/7 प्रदूषण स्रोत निगरानी प्रणाली को जोड़ना शामिल है।
यह पूरी कार्रवाई CAQM (कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) के निर्देशों के बाद की जा रही है, जिसने MCD के सभी 12 जोनों में 'लेगेसी डस्ट' हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया था और 31 अक्टूबर 2026 तक सड़कों और डिवाइडरों को मलबे से मुक्त करने का अल्टीमेटम दिया था। कमिश्नर खिरवार ने साफ किया है कि प्रदूषण से लड़ने के लिए सभी सरकारी स्तरों पर निरंतर कार्रवाई और सख्त निगरानी की जरूरत है।