दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी ने अवैध निर्माण और पीजी आवासों की पहचान के लिए पूरे शहर में एक बड़ा सर्वे शुरू किया है। यह कार्रवाई 6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन में हुए एक दर्दनाक इमारत हादसे के बाद शुरू की गई है, जिसमें सात लोगों की जान चली गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी जोन के कार्यकारी इंजीनियरों को अपने क्षेत्र में हर पीजी सुविधा का निरीक्षण करने का आदेश दिया है ताकि बिल्डिंग प्लान, अग्नि सुरक्षा दिशा-निर्देशों और दिल्ली के मास्टर प्लान का पालन सुनिश्चित किया जा सके। सत्य निकेतन की घटना के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए एमसीडी ने 7 सितंबर 2026 को दक्षिण जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जिसमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने छात्र हॉस्टल और पीजी आवासों के गहन निरीक्षण के निर्देश दिए हैं और इस बात पर जोर दिया है कि वरिष्ठ नागरिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से विध्वंस कार्यों की निगरानी करनी चाहिए। इसके अलावा,
मुख्यमंत्री ने सत्य निकेतन स्थल के आसपास सुरक्षा पूरी तरह से सत्यापित होने तक निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया है।
एमसीडी के आंकड़ों से इस अभियान के दायरे का पता चलता है।
1 जून और 9 सितंबर 2026 के बीच निगम ने 1,053 विध्वंस कार्रवाई की और 491 संपत्तियों को सील किया। विशेष रूप से, 7 सितंबर से 9 सितंबर 2026 के बीच अधिकारियों ने 1,252 पीजी इमारतों का सर्वे किया, जिनमें से 39 में मामूली मरम्मत, नौ में बड़ी मरम्मत की जरूरत पहचानी गई और तीन को खतरनाक श्रेणी में रखा गया, जिनमें से एक को पहले ही गिराया जा चुका है। 8 सितंबर 2026 तक एजेंसियों ने घटना स्थल के पास और पूरी राजधानी में 62 खतरनाक संरचनाओं की पहचान की थी।
एमसीडी ने चार मंजिला से अधिक सभी अनधिकृत निर्माणों को तुरंत सील करने का आदेश जारी किया है और चेतावनी दी है कि ऐसे उल्लंघनों की अनुमति देने वाले अधिकारियों को बर्खास्तगी सहित कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। 14 सितंबर 2026 तक यह सर्वे जारी है और अधिकारी यह पता लगाने के लिए पुराने बिल्डिंग रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं कि अनधिकृत काम कब हुआ और इसके लिए कौन से अधिकारी जिम्मेदार थे।