प्रदूषण से जंग: दिल्ली की सड़कों से धूल हटाने के लिए MCD उतारेगी 700 हॉपर पिकर

दिल्ली में स्मॉग और धूल से निपटने के लिए MCD 700 हॉपर पिकर और नई मशीनें तैनात कर रही है। जानें क्या है पूरा प्लान।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
प्रदूषण से जंग: दिल्ली की सड़कों से धूल हटाने के लिए MCD उतारेगी 700 हॉपर पिकर

सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और स्मॉग की चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अपनी कमर कस ली है। शहर की हवा को साफ रखने और सड़कों पर जमा धूल को कम करने के लिए निगम ने 700 हॉपर पिकर तैनात करने का बड़ा फैसला लिया है। MCD स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन सत्य शर्मा ने साफ किया है कि धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई और कचरा प्रबंधन के जरिए प्रदूषण के स्तर को नीचे लाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।

निगम ने इस लड़ाई के लिए मशीनों का एक पूरा बेड़ा तैयार किया है। फिलहाल शहर में 66 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें, 167 वॉटर स्प्रिंकलर और 28 एंटी-स्मॉग गन काम कर रही हैं। खास बात यह है कि इन मशीनों के लिए अलग-अलग जोन में सटीक लोकेशन तय की गई हैं ताकि अधिकतम प्रभाव पड़ सके। धूल को कम करने के लिए इस साल 1,202 किलोमीटर सड़कों के सुधार का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से जनवरी से सितंबर के बीच 745 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, सड़कों के गड्ढों को भरने और गाद (silt) निकालने के लिए भी विशेष अभियान चलाया गया है।

नई मशीनों और तकनीक का होगा इस्तेमाल

सफाई व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए MCD अब नई तकनीक और ईको-फ्रेंडली मशीनों की ओर बढ़ रहा है। निगम ने 15 CNG संचालित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों और 55 इलेक्ट्रिक स्वीपिंग वाहनों के लिए ऑर्डर जारी किए हैं, जिन्हें नवंबर तक चरणबद्ध तरीके से सड़कों पर उतारा जाएगा। वहीं, 700 हॉपर पिकर्स की तैनाती का लक्ष्य 31 दिसंबर तक पूरा करने का तय किया गया है। इसके साथ ही 12 नए वॉटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन भी जल्द ही काम शुरू करेंगे।

सिर्फ सड़कों की सफाई ही नहीं, बल्कि मलबे के सही निपटान के लिए 'शहरी मलबा' ऐप लॉन्च किया गया है, क्योंकि दिल्ली में रोजाना करीब 5,000 से 6,000 मीट्रिक टन निर्माण और विध्वंस कचरा निकलता है। पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के लिए अप्रैल से सितंबर के बीच 1.34 लाख से ज्यादा पेड़ और करीब 2.74 लाख झाड़ियाँ लगाई गई हैं। निगम का मुख्य फोकस अब धूल के स्रोतों को नियंत्रित करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर है।

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