दिल्ली में लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक पर MCD पर बरसी जनता और अदालत, लापरवाही पर गंभीर सवाल

दिल्ली में लावारिस कुत्तों की समस्या को लेकर नगर निगम यानी एमसीडी पर जनता और अदालतों की तरफ से गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। संगम विहार और स्वरूप नगर में हुई हालिया दर्दनाक घटनाओं के बाद जनता में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। 19 सितंबर 2026 को संगम विहार में 18 महीने के एक बच्चे पर कुत्तों ने भयानक हमला किया था। इसके अलावा 18 सितंबर को स्वरूप नगर में 17 साल के एक मृतक का शव मिला था, जिसे आवारा कुत्तों ने बुरी तरह नोंच लिया था। इन घटनाओं के बाद से स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।
एमसीडी पर आरोप है कि वह कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर होम बनाने के काम में बहुत पीछे चल रही है। द्वारका सेक्टर-29 में 1,500 कुत्तों की क्षमता वाले बड़े शेल्टर होम का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है और इसे तैयार होने में अभी तीन महीने का समय और लगेगा। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 25,000 कुत्तों के टीकाकरण और माइक्रोचिपिंग के लिए करीब 35 करोड़ रुपये रखे गए थे। हालांकि अधिकारियों ने माना है कि निगम के पास कुत्तों की कोई सटीक गिनती नहीं है, लेकिन अनुमान है कि दिल्ली में लगभग 8 लाख आवारा कुत्ते मौजूद हैं।
कानूनी मोर्चे पर भी एमसीडी की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के 19 मई 2026 के फैसले के बाद एमसीडी को एनिमल बर्थ कंट्रोल फ्रेमवर्क लागू करने और जन सुरक्षा सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को पायलट नसबंदी कैंप शुरू करने के निर्देश दिए थे और अब 2030 तक रेबीज खत्म करने के प्रयासों पर दिल्ली सरकार, एमसीडी तथा एनडीएमसी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। बिजवासन और बेला रोड पर क्षमता बढ़ाकर 8,000 कुत्ते करने की योजनाएं भी थीं, लेकिन जमीन पर काम धीमा होने के कारण जनता में नाराजगी लगातार बनी हुई है।