दिल्ली में डेंगू का कहर: 695 मामले सामने आने के बाद MCD ने छेड़ा मच्छरों के खिलाफ युद्ध

राजधानी दिल्ली में वेक्टर-जनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। शहर में दिल्ली डेंगू मामले अब 695 तक पहुंच गए हैं, जिसके बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही 98 नए केस दर्ज किए गए हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि मच्छरों का प्रकोप अभी थमा नहीं है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल सितंबर का महीना सबसे घातक रहा, जिसमें रिकॉर्ड 286 मामले सामने आए। डेंगू के अलावा मलेरिया और चिकनगुनिया ने भी दस्तक दी है। अब तक मलेरिया के 266 और चिकनगुनिया के 29 मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि साल 2026 में अब तक इन बीमारियों से किसी की जान नहीं गई है।
लाखों घरों की जांच और भारी जुर्माना
बीमारी को रोकने के लिए MCD ने जमीन पर बड़ा अभियान शुरू किया है। डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स के जरिए अब तक करीब 3.18 करोड़ घरों का दौरा किया गया है। इस जांच के दौरान 1.89 लाख से ज्यादा घरों में मच्छरों के पनपने की जगह (ब्रीडिंग साइट्स) मिली हैं। निगम ने इसे गंभीरता से लेते हुए 1,32,172 कानूनी नोटिस जारी किए हैं और 20,882 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। अब तक लापरवाही बरतने वालों से 29.70 लाख रुपये का जुर्माना वसूला जा चुका है।
मेयर प्रवेष वाही ने इस पूरी मुहिम की कमान संभाली हुई है और उन्होंने घनी आबादी वाले इलाकों में हर 15 दिन में फॉगिंग कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने भी नगर निगम को सार्वजनिक स्थानों पर एंटी-लार्वा ऑपरेशन और सघन फॉगिंग तेज करने को कहा है। MCD कमिश्नर अश्वनी कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि किसी ऑफिस, संस्थान या कार्यस्थल पर मच्छरों के पनपने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दिल्लीवासियों को आगाह किया है कि वे खुद डॉक्टर न बनें। डेंगू और मलेरिया के लक्षण अक्सर आम वायरल बुखार जैसे होते हैं, इसलिए किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत पेशेवर जांच करानी चाहिए।