फॉर्म 7 विवाद: 'मुसलमानों के नाम पर राजनीति कर रहे ओवैसी', मौलाना साजिद रशीदी का पलटवार

वोटर लिस्ट में नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 7' को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIAA) के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला है। रशीदी ने ओवैसी पर आरोप लगाया कि वह बिना किसी ठोस सबूत के गलत जानकारी फैला रहे हैं और केवल मुस्लिम पहचान की राजनीति कर रहे हैं।
दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान गलत तरीके से फॉर्म 7 दाखिल किए जा रहे हैं ताकि मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकें। ओवैसी ने इसे भाजपा और संघ परिवार की साजिश बताते हुए हैदराबाद में बड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी।
बिना डेटा के दावे करना गैर-जिम्मेदाराना: रशीदी
मौलाना साजिद रशीदी ने ओवैसी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि फॉर्म 7 का प्रावधान केवल मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि हर मतदाता के लिए है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि कोई मतदाता उस पते पर नहीं रहता या उसकी मृत्यु हो चुकी है, तो अधिकारी उसकी पूरी जांच करते हैं, पड़ोसियों से बात करते हैं और सत्यापन के बाद ही कोई फैसला लेते हैं।
रशीदी ने ओवैसी की कानूनी पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा, "बैरिस्टर होने के नाते ओवैसी को पता होना चाहिए कि यह एक वैधानिक प्रक्रिया है। उन्हें बिना डेटा के ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बातें नहीं कहनी चाहिए जिससे आम लोग भ्रमित हों।"
उन्होंने ओवैसी को चुनौती देते हुए कहा कि पहले यह साबित करें कि तेलंगाना में जिन 92,000 लोगों के नाम हटाए गए, उनमें कितने मुस्लिम थे और कितनों के खिलाफ फॉर्म 7 का गलत इस्तेमाल हुआ। रशीदी के मुताबिक, यह ओवैसी की पुरानी आदत है कि वे किसी भी मुद्दे को मुसलमानों से जोड़कर राजनीति करते हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय अब इतना अनजान नहीं है।
बता दें कि फॉर्म 7 का उपयोग वोटर लिस्ट में किसी नाम पर आपत्ति जताने या उसे हटाने के अनुरोध के लिए किया जाता है। ओवैसी का दावा था कि कई ऐसे फॉर्म जमा किए जा रहे हैं जिनमें आवेदन करने वाले व्यक्ति की जानकारी गायब है, जो पूरी तरह गलत है।