'वसुधैव कुटुंबकम' ही वैश्विक एकता का आधार: माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी समारोह में बोले LG
दिल्ली एलजी तरणजीत सिंह संधू ने माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी समारोह में 'वसुधैव कुटुंबकम' के संदेश पर जोर दिया।

दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) तरणजीत सिंह संधू ने रविवार को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित पूजनीय माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी समारोह में शिरकत की। इस गरिमामय अवसर पर भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम में भारत और ब्रिटेन के कई दिग्गज पहुंचे, जिन्होंने वैश्विक शांति और एकता को बढ़ावा देने में भारत की आध्यात्मिक विरासत, मानवीय मूल्यों और दर्शन की अहमियत को रेखांकित किया।
एलजी संधू ने माताजी के सेवाभावी जीवन, उनके समर्पण और त्याग को याद करते हुए उन्हें मानवता के लिए एक प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। उपराज्यपाल ने जोर देकर कहा कि माताजी का जीवन निस्वार्थ सेवा और समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण था।
वैश्विक चुनौतियों का समाधान है सहयोग और करुणा
सभा को संबोधित करते हुए एलजी संधू ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, सामाजिक असमानता और स्वास्थ्य आपातकाल जैसी गंभीर समस्याओं का समाधान केवल आपसी सहयोग और करुणा के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने आधुनिक दुनिया में योग के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक फिटनेस का साधन नहीं है, बल्कि मानसिक शांति और संतुलित जीवन जीने का एक प्रभावी तरीका है। उन्होंने विश्वास जताया कि गुरुदेव और माताजी की शिक्षाएं मानवता को विश्व शांति और कल्याण की ओर ले जाने में मार्गदर्शक बनी रहेंगी।
इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य कृष रावल ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने आध्यात्मिकता, योग, ध्यान और यज्ञ को दुनिया के लिए भारत का अमूल्य योगदान बताया। रावल के अनुसार, वास्तविक वैश्विक परिवर्तन व्यक्ति के भीतर से शुरू होता है और जब लोग सकारात्मक सोच व करुणा विकसित करते हैं, तभी स्थायी सामाजिक बदलाव संभव है। वहीं, हाउस ऑफ लॉर्ड्स के एक अन्य सदस्य रसेल रूक ने कहा कि आध्यात्मिक जागृति और विश्वास के जरिए दुनिया की मौजूदा समस्याओं को हल किया जा सकता है।
चर्च ऑफ इंग्लैंड के बिशप राइट रेवरेंड लुसा ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया को अब और अधिक प्रेम और एकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोगों को जाति, धर्म, भाषा और राष्ट्रीयता की सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति अपनेपन की भावना विकसित करनी चाहिए। उनके अनुसार, 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश अलग-अलग देशों और समुदायों को जोड़ने वाले एक पुल के रूप में काम कर सकता है।
कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा भी हुई, जिसमें लॉर्ड रसेल रूक ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पंड्या को 2027 में यूनाइटेड किंगडम में होने वाले G20 कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि डॉ. पंड्या के विचार और भारतीय संस्कृति का संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई दिशा प्रदान करेगा।