बुराड़ी के पास यमुना में हजारों मछलियों की मौत, पानी में घुला जहर!

Kittu Kumari15 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
बुराड़ी के पास यमुना में हजारों मछलियों की मौत, पानी में घुला जहर!

दिल्ली की यमुना नदी एक बार फिर अपनी बदहाली की गवाही दे रही है। उत्तर दिल्ली के बुराड़ी इलाके में बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को नदी के किनारों पर हजारों मृत मछलियां तैरती मिलीं। इनमें मुख्य रूप से तिलापिया और कॉमन कार्प प्रजाति की मछलियां शामिल हैं। इस घटना ने नदी के पारिस्थितिक तंत्र (Ecology) की गंभीर स्थिति को एक बार फिर सबके सामने ला दिया है।

इस भयावह मंजर की जानकारी 15 अक्टूबर को 'न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी' ने तस्वीरों और वीडियो के जरिए साझा की। स्थानीय मछुआरों ने बताया कि 14 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे उन्होंने यमुना में गंदा पानी आते देखा था, जिसके कुछ ही समय बाद मछलियां मरने लगीं। सोसाइटी का अनुमान है कि हरियाणा की नहरों के जरिए आए केमिकल वेस्ट या 12 अक्टूबर को हुई एसिड रेन के असर से यह हादसा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में घुले जहरीले पदार्थ और ऑक्सीजन की भारी कमी ने इन मछलियों की जान ले ली।

प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी बनी वजह

पर्यावरण विशेषज्ञ विमलेन्दु झा ने इस घटना को कोई रहस्य नहीं बताया। उनके अनुसार, ट्रीटमेंट प्लांटों की खराब कार्यप्रणाली और लगातार बहने वाले गंदे पानी (Effluent Discharge) की वजह से पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर बेहद गिर गया है। वहीं, 'साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल' (SANDRP) के सदस्य भीम सिंह रावत ने मानसून के बाद इस तरह की मौतों को असामान्य बताया और इसे जलीय जैव विविधता के लिए एक गंभीर खतरा करार दिया।

गौरतलब है कि बुराड़ी क्षेत्र में मछलियों की सामूहिक मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है; इससे पहले मई 2025 और इस साल संजय झील में भी ऐसा ही मंजर देखा गया था। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पहले ही दिल्ली, हरियाणा, यूपी, हिमाचल और उत्तराखंड के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CIFRI) की सिफारिशों को लागू करें। NGT ने CPCB को भी आदेश दिया था कि वह दिल्ली और हरियाणा के बीच समन्वय स्थापित कर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही तय करे।

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