चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हजारों प्रदर्शनकारी, भारी तनाव

Kittu Kumari12 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हजारों प्रदर्शनकारी, भारी तनाव

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर भारी गहमागहमी का माहौल है। 12 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। यह विरोध प्रदर्शन चुनावी सूचियों में गड़बड़ी और कथित वोट धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ा है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सांसद राहुल गांधी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत से मुलाकात करने की कोशिश की, लेकिन CJI ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची संशोधन का मामला पहले से ही विचाराधीन (sub judice) है और अदालत प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि वे न्यायिक प्रक्रिया के तहत औपचारिक याचिका दायर करें।

'वोट चोरी' का आरोप और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

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राहुल गांधी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारियों पर 'वोट चोरी' की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के लगभग 200 अधिकारी विपक्ष को इस गड़बड़ी की जानकारी दे रहे हैं। दूसरी ओर, भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। आयोग का कहना है कि संशोधन प्रक्रिया का उद्देश्य केवल फर्जी, मृत और दोहराव वाले नामों को हटाना है।

इस विरोध प्रदर्शन के चलते दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक छह मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा गया। खबर है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के पास पुलिस बैरिकेड्स भी तोड़ दिए हैं। इस मार्च में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के युवा सदस्य भी शामिल हैं, जिन्होंने दिल्ली पुलिस पर हिरासत के दौरान मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

इस विवाद पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां 124 पूर्व IAS और IFS अधिकारियों ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहा कि बिना सबूतों के ऐसे आरोप जनता के भरोसे को तोड़ते हैं, वहीं भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्षी दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग विचार होना लोकतांत्रिक कामकाज का हिस्सा है।

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