नयी दिल्ली। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बुधवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कामकाज को प्रभावित करने के लिए आयोग के बाहर से कोई अदृश्य ताकत काम कर रही है। यह बयान इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची प्रक्रियाओं से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्ति जताई थी। एएनआई से बात करते हुए तिवारी ने कहा कि अगर दो चुनाव आयुक्त मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के हर फैसले पर बार-बार आपत्ति जता रहे हैं, तो आयोग के फैसलों पर बाहरी प्रभाव की संभावना है। सभी जानकारी के लिए The Indian Express की रिपोर्ट देख सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले या तो सर्वसम्मति से होने चाहिए या बहुमत के वोट से होने चाहिए। यदि दो चुनाव आयुक्त फैसलों पर आपत्ति जता रहे थे और इसके बावजूद फैसले लागू किए गए, तो इसका मतलब है कि प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है और पूरी
SIR एक्सरसाइज को शुरुआत से ही रद्द किया जाना चाहिए। तिवारी ने यह भी सुझाव दिया कि चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ
महाभियोग चलाया जाना एक उपयुक्त मामला बनता है।
इससे पहले कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा था और इस मुद्दे पर उनके तुरंत इस्तीफे की मांग की थी। वेणुगोपाल ने कहा था कि ज्ञानेश कुमार को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से असली मतदाताओं पर असर पड़ सकता है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इस रिपोर्ट को कमतर आंकते हुए कहा कि चुनाव आयोग के सभी फैसले, जिनमें एसआईआर से जुड़े फैसले भी शामिल हैं, दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए थे।