छात्र की आत्महत्या पर मनीष सिसोदिया का बड़ा बयान, हैप्पीनेस करिकुलम बंद करने को बताया वजह
मनीष सिसोदिया का दावा- हैप्पीनेस करिकुलम बंद होने से बढ़ी छात्रों की तनाव, बीजेपी ने बताया गैर-जिम्मेदाराना बयान।

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर शिक्षा और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर घमासान छिड़ गया है। आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने एक छात्रा की हालिया आत्महत्या को 'हैप्पीनेस करिकुलम' (Happiness Curriculum) के बंद होने से जोड़ दिया है। सिसोदिया का दावा है कि अगर दिल्ली सरकार की इस पहल को जारी रखा गया होता, तो शायद इस दुखद घटना को रोका जा सकता था।
25 अक्टूबर 2026 को दिए अपने बयान में मनीष सिसोदिया ने कहा कि AAP सरकार ने यह प्रोग्राम विशेष रूप से इसलिए शुरू किया था ताकि छात्र तनाव और अपनी भावनात्मक स्थिति को बेहतर तरीके से संभाल सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि पढ़ाई के दबाव के बीच बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था।
बीजेपी ने पलटवार करते हुए बयान को बताया 'तर्कहीन'
सिसोदिया के इस दावे पर दिल्ली बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी प्रवक्ता ने सिसोदिया के बयान को पूरी तरह से 'तर्कहीन' और 'गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया है। बीजेपी का तर्क है कि 2015 से 2024 के बीच, जब हैप्पीनेस करिकुलम पूरी तरह लागू था, तब भी स्कूलों में छात्रों की आत्महत्या, हिंसा और शिक्षकों पर हमलों की घटनाएं सामने आई थीं। बीजेपी ने सवाल उठाया है कि उन घटनाओं की जवाबदेही किसकी है और एक दुखद मौत को राजनीति से क्यों जोड़ा जा रहा है।
बता दें कि दिल्ली सरकार ने जुलाई 2018 में नर्सरी से कक्षा 8 तक के छात्रों के लिए 'हैप्पीनेस करिकुलम' की शुरुआत की थी। इस पाठ्यक्रम का मुख्य लक्ष्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि ध्यान (meditation) और मानसिक अभ्यासों के जरिए बच्चों में आत्म-जागरूकता, माइंडफुलनेस और बेहतर संवाद कौशल विकसित करना था। मनीष सिसोदिया ने अपने कार्यकाल के दौरान इस मॉडल को काफी बढ़ावा दिया था और निजी स्कूलों से भी इसे अपनाने की अपील की थी, ताकि बच्चों में बढ़ते तनाव और डिप्रेशन को कम किया जा सके।