मंगोलपुरी की जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर
दिल्ली के मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया की जूता फैक्ट्री में लगी आग ने 4 लोगों की जान ले ली। लॉक गेट और धुएं ने बढ़ाई मुश्किल।

उत्तर पश्चिम दिल्ली के मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया (फेज-1) में शुक्रवार रात एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। यहाँ एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में लगी भीषण आग की चपेट में आने से चार मजदूरों की जान चली गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब फैक्ट्री के बेसमेंट से आग की लपटें उठीं और देखते ही देखते पूरा परिसर धुएं से भर गया।
घटना शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे की है। आग इतनी तेजी से फैली कि ऊपरी मंजिलों पर काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। दिल्ली फायर सर्विस को सूचना मिलते ही करीब 20 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद चौथी मंजिल की सीढ़ियों से पांच और तीसरी मंजिल से एक व्यक्ति को बाहर निकाला। सभी को तुरंत संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अशोक (25), हरिहर (40), लाल बाबू (38) और प्रेम चंद (50) को मृत घोषित कर दिया गया।
बंद था बाहर निकलने का रास्ता, ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे मजदूर
इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह रही कि फैक्ट्री के बाहर निकलने के दरवाजे लॉक थे। हादसे में बचे 22 वर्षीय विकास ने बताया कि जब आग लगी और धुआं बढ़ा, तो वे बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन गेट बंद होने के कारण उन्हें छत की ओर भागना पड़ा। फिलहाल, हरिंदर नाम का एक व्यक्ति ICU में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
पुलिस ने इस मामले में बड़ी लापरवाही बरतते हुए 'क्युल्पेबल होमिसाइड' (अपराधिक मानव वध) और लापरवाही का केस दर्ज किया है। पुलिस ने सुरेश चंद (47) और अशोक (47) नाम के दो लोगों को हिरासत में लिया है। डीसीपी (आउटर डिस्ट्रिक्ट) विक्रम सिंह ने बताया कि फैक्ट्री मालिक और कॉन्ट्रैक्टर्स से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसे के वक्त वहां कुल कितने मजदूर मौजूद थे और आग लगने की असली वजह क्या थी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और घायलों के बेहतर इलाज व पीड़ित परिवारों को मदद देने के निर्देश दिए हैं। फायर ऑफिसर ए.डी.ओ. पारस कुमार के अनुसार, आग बेसमेंट तक ही सीमित थी, लेकिन धुएं की इतनी अधिक सघनता थी कि बचाव कार्य में भारी दिक्कतें आईं। गौरतलब है कि अगस्त 2026 में ही नए फायर सेफ्टी नियम लागू किए गए थे, जिनमें स्मोक मैनेजमेंट और इमरजेंसी गेट जैसे कड़े प्रावधान थे, जिनका पालन यहाँ नहीं किया गया।