मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सीपीएम महासचिव एमए बेबी हिरासत में लिए गए

Kittu Kumari29 September 20262 min read1 viewNational
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सीपीएम महासचिव एमए बेबी हिरासत में लिए गए

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ वाम दलों के प्रदर्शन के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी को हिरासत में ले लिया गया। यह विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के बाहर हुआ। यह प्रदर्शन पांच वाम दलों - सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई (एमएल) लिबरेशन, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक द्वारा घोषित एक व्यापक अभियान का हिस्सा था। दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को रोकने की मांग की है। दलों ने 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक एक हफ्ते के विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम की घोषणा की थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एसआईआर अभियान नागरिकों के मतदान के अधिकारों के लिए खतरा है।

माकपा और भाकपा नेताओं के बयान

प्रदर्शन में शामिल हुईं भाकपा नेता वृंदा करात ने सीईसी को हटाने और चुनाव आयोग के नियमों में बदलाव की मांग की। वृंदा करात ने कहा कि सीईसी को या तो बर्खास्त किया जाना चाहिए या उन्हें इस्तीफा देना चाहिए, और एसआईआर को तुरंत रोका जाना चाहिए। 2023 के नियमों में संशोधन किया जाना चाहिए और चुनाव आयोग को ठीक किया जाना चाहिए। माकपा नेता सुभाषिनी अली ने कहा कि वाम दलों ने एसआईआर के विरोध में देश भर में रोजाना प्रदर्शन करने का फैसला किया है। सुभाषिनी अली ने आरोप लगाया कि सरकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीन रही है। उन्होंने कहा कि संविधान तभी काम कर सकता है जब हर नागरिक को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अधिकार हो।

एसआईआर पर विवाद और चुनाव आयोग का रुख

एसआईआर को लेकर उपजा विवाद विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच टकराव का मुद्दा बन गया है। आलोचकों ने मतदाता सूचियों के संशोधन और योग्य मतदाताओं के बाहर होने की संभावना पर चिंता जताई है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों की सटीकता सुनिश्चित करना और योग्य मतदाताओं की भागीदारी को सुगम बनाना है। वाम दलों ने इस मुद्दे पर विपक्षी समूहों और नागरिक समाज संगठनों के बीच व्यापक तालमेल की भी मांग की है। माकपा नेताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग के कामकाज और मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए जनता की निगरानी जरूरी है। दिल्ली में यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की संशोधन प्रक्रिया पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच हुआ है।

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