गुरुग्राम जमीन विवाद: M3M ने कहा- दिल्ली कोर्ट ने हटाया विश्वासघात का आरोप, इसे 'झटका' न मानें
दिल्ली कोर्ट ने M3M के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात का आरोप हटाया। कंपनी ने इसे झटका मानने से इनकार करते हुए न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताया है।

गुरुग्राम की जानी-मानी रियल एस्टेट कंपनी M3M ने दिल्ली की एक अदालत द्वारा जमीन विवाद मामले में दिए गए हालिया फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि मीडिया रिपोर्ट्स में इस आदेश को कंपनी के लिए 'झटका' बताया जा रहा है, जो कि गलत है। M3M ने कहा कि अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) के गंभीर आरोपों को खारिज कर दिया है।
दरअसल, यह पूरा मामला गुरुग्राम में जमीन के लेन-देन और उसके बदले भुगतान न करने के आरोपों से जुड़ा है। तिहाड़ कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज अंजू बजाज चंदना ने 17 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में कोर्ट ने आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत लिए गए संज्ञान को रद्द कर दिया। अदालत का मानना था कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों को अगर सच मान भी लिया जाए, तो भी यह अपराध नहीं बनता है।
कंपनी का पक्ष और कानूनी स्थिति
M3M ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अभी तक कोई आरोप तय (Charge Frame) नहीं किया गया है और न ही किसी ट्रायल का आदेश दिया गया है। कंपनी के मुताबिक, मामला अभी केवल संज्ञान (Cognizance) के स्तर पर है। कंपनी ने जोर देकर कहा कि एक्सचेंज डीड्स का निष्पादन एमार (Emaar) की जमीन मालिक कंपनियों और M3M ग्रुप की कंपनियों के बीच हुआ था, न कि MGF डेवलपमेंट्स के साथ।
कंपनी ने आगे बताया कि इस विवाद से जुड़ी राशि और ब्याज पहले ही सिविल कोर्ट में जमा किया जा चुका है। M3M का दावा है कि यह पूरी तरह से एक कमर्शियल विवाद है, जिसे उचित फोरम में सुलझाया जा रहा है। हालांकि, कोर्ट ने धोखाधड़ी (धारा 420) और आपराधिक साजिश (धारा 120B) जैसे अन्य आरोपों पर कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया है। कंपनी का कहना है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और वे कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखेंगे।