गुरुग्राम जमीन विवाद: दिल्ली कोर्ट ने M3M इंडिया और प्रमोटरों पर धोखाधड़ी के आरोप रखे बरकरार
दिल्ली की अदालत ने गुरुग्राम जमीन विवाद में M3M इंडिया और उसके प्रमोटरों के खिलाफ धोखाधड़ी की कार्यवाही को बरकरार रखा है।

गुरुग्राम में जमीन विवाद को लेकर फंसे M3M इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले में कंपनी, उसकी सहायक कंपनियों और प्रमोटरों बसंत बंसल, रूप बंसल और पंकज बंसल के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि धोखाधड़ी के आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
यह पूरा मामला MGF डेवलपमेंट्स लिमिटेड द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से शुरू हुआ था। आरोप है कि गुरुग्राम के चौमा इलाके में जमीन के अधिकारों के बदले हुए सौदे में M3M ने तय भुगतान नहीं किया। शिकायत के मुताबिक, चौमा की जमीन के बदले मोहम्मदपुर गुर्जर की प्रॉपर्टी और कुछ नकद राशि का लेन-देन तय हुआ था। लेकिन MGF का दावा है कि भुगतान के लिए दिए गए पोस्ट-डेटेड चेक बाउंस हो गए, जिससे उन्हें करीब 450 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
कोर्ट ने किन धाराओं के तहत कार्यवाही को मंजूरी दी?
प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज अंजू बजाज चंदना ने 17 अक्टूबर 2026 को अपना आदेश सुनाते हुए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (आपराधिक साजिश) और 34 (साझा इरादा) के तहत कार्यवाही को बरकरार रखा है। हालांकि, कोर्ट ने धारा 406 (विश्वासघात) के तहत संज्ञान को रद्द कर दिया, क्योंकि अदालत के अनुसार इस मामले में संपत्ति सौंपने (entrustment) की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं होती दिखी।
यह फैसला चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा के 31 जनवरी 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली दो रिवीजन याचिकाओं के बाद आया है। अब आरोपी प्रमोटर और कंपनी मजिस्ट्रेट के सामने अपनी दलीलें पेश कर सकते हैं। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को आगामी 27 अक्टूबर 2026 को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।