गुरुग्राम जमीन विवाद: M3M इंडिया के खिलाफ धोखाधड़ी की कार्यवाही जारी रखने का दिल्ली कोर्ट का फैसला
दिल्ली की अदालत ने गुरुग्राम जमीन विवाद में M3M इंडिया के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश की कार्यवाही को मंजूरी दे दी है।

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुग्राम में जमीन विवाद से जुड़े मामले में M3M इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, उसकी सहायक कंपनियों और कई अन्य व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि जमीन के बदले तय की गई रकम का भुगतान न करने के आरोपों पर आपराधिक मामला आगे बढ़ेगा।
यह पूरा मामला MGF डेवलपमेंट्स लिमिटेड द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर से शुरू हुआ था। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने गुरुग्राम के चौमा इलाके में जमीन के एक्सचेंज डीड और भुगतान के भरोसे के जरिए जमीन पर अधिकार हासिल किए थे। इस सौदे में चौमा की जमीन के बदले मोहम्मदपुर गुर्जर की जमीन और कुछ अतिरिक्त नकद भुगतान तय हुआ था। आरोप है कि भुगतान के लिए दिए गए पोस्ट-डेटेड चेक बाउंस हो गए, लेकिन इसके बावजूद आरोपियों ने जमीन को अपने नाम करवा लिया और वहां रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया।
धोखाधड़ी और साजिश के आरोप रहेंगे बरकरार
प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज अंजू बजाज चंदना ने आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (आपराधिक साजिश) और 34 (साझा इरादा) के तहत संज्ञान लेने के फैसले को बरकरार रखा है। हालांकि, कोर्ट ने धारा 406 (विश्वासघात/क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) के तहत कार्यवाही को खारिज कर दिया। कोर्ट का मानना था कि इस मामले में संपत्ति को 'भरोसे' पर सौंपा नहीं गया था, बल्कि यह एक औपचारिक एक्सचेंज डीड के जरिए हुआ लेनदेन था, इसलिए विश्वासघात की धारा नहीं बनती।
M3M और अन्य आरोपियों ने दलील दी थी कि यह पूरी तरह से एक सिविल और कमर्शियल विवाद है, जो कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन से जुड़ा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भुगतान और ब्याज की राशि अदालत में जमा कर दी गई है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि रिवीजन स्टेज पर सबूतों की विस्तृत जांच नहीं की जा सकती और आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने अपनी दलीलें पेश करने की आजादी होगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष होगी, जहां मामले की तेजी से कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।