Lord’s Mark Industries ने Radio Electric का किया अधिग्रहण, इंजीनियरिंग क्षमताएं होंगी मजबूत

बिजनेस जगत से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां Lord’s Mark Industries Limited ने अपनी विस्तार योजना के तहत Radio Electric Private Limited के अधिग्रहण की आधिकारिक घोषणा की है। 12 अक्टूबर 2026 को हुई इस डील के जरिए कंपनी अब स्पेशलाइज्ड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करेगी। इस अधिग्रहण की जानकारी कंपनी ने सेबी (SEBI) के नियमों के तहत बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दे दी है।
Radio Electric, जो कि मशहूर 'Radiotone' ब्रांड का मालिक है, की स्थापना साल 1939 में हुई थी। करीब नौ दशकों के अनुभव वाली यह कंपनी अब Lord's Mark Industries के लाइटिंग एंड एनर्जी डिवीजन का हिस्सा होगी। इस रणनीतिक कदम से कंपनी को न केवल पुराना अनुभव मिलेगा, बल्कि भविष्य के नए बाजारों में प्रवेश करने का रास्ता भी खुलेगा।
बैटरी स्टोरेज और मेडिकल डिवाइसेस में मिलेगा फायदा
Lord’s Mark Industries के मैनेजिंग डायरेक्टर सचिदानंद उपाध्याय के मुताबिक, इस अधिग्रहण से कंपनी को तेजी से बढ़ते बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) सेक्टर में एक प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी। इसके अलावा, अब कंपनी अपने मेडिकल डिवाइस बिजनेस के लिए जरूरी पुर्जों का निर्माण इन-हाउस यानी खुद कर सकेगी, जिससे प्रॉफिट मार्जिन में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
खास बात यह है कि Radio Electric वर्तमान में कर्ज मुक्त और मुनाफे में चलने वाली कंपनी है। इसके ग्राहकों में Siemens, L&T और Hitachi Hi-Rel Power Electronics जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। साथ ही, यह कंपनी यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया के सात देशों में अपना सामान निर्यात करती है।
डील को सुचारू रूप से चलाने के लिए Radio Electric के पूर्व मालिक उमेश मराठे एक साल तक सलाहकार (Consultant) के तौर पर कंपनी से जुड़े रहेंगे, ताकि डिजाइन और प्रोसेस की पूरी जानकारी सही तरीके से ट्रांसफर हो सके।
कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर नजर डालें तो वह अब टेस्ट और मेजरमेंट लैबोरेटरीज, रिसर्च सेंटर्स और शिक्षण संस्थानों जैसे नए बाजारों पर ध्यान केंद्रित करेगी। आने वाले समय में कंपनी मोटरइज्ड Variacs और डिजिटल मीटरed Variacs जैसे नए प्रोडक्ट्स विकसित करने की तैयारी में है। गौरतलब है कि हाल ही में कंपनी की 46वीं वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों ने कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी थी।