लेहरा दो तिरंगा रैली: दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके समेत 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, मचा बवाल

देश की राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस में शुक्रवार को उस समय तनाव बढ़ गया जब 'लेहरा दो तिरंगा' रैली के दौरान दिल्ली पुलिस ने करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई में CJP कार्यकर्ता अभिजीत दीपके भी शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत पकड़ा। यह रैली चुनाव आयोग द्वारा कथित संस्थागत अनियमितताओं के खिलाफ विरोध जताने और तिरंगा फहराने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
जानकारी के मुताबिक, अभिजीत दीपके को NCP-SCP प्रवक्ता अनीश गावंडे के आवास से निकलते समय हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताया कि कनॉट प्लेस में धारा 163 लागू है, जिसके कारण सार्वजनिक सभाओं पर रोक है। दीपके को दो अलग-अलग नोटिस भी दिए गए हैं—एक दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत सेंट्रल पार्क जाने पर पाबंदी को लेकर और दूसरा एक पुराने बॉन्ड के उल्लंघन के आरोप में, जिसमें सार्वजनिक शांति बनाए रखने का वचन दिया गया था। इसके अलावा, मंडी हाउस के पास मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे AISA और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
विपक्ष ने केंद्र सरकार पर लगाया 'तानाशाही' का आरोप
इस कार्रवाई के बाद विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे 'अघोषित आपातकाल' करार देते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में युवाओं को तिरंगा फहराने और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करने के लिए हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने इसे एक फासीवादी शासन का व्यवहार बताया जो असहमति की आवाज को दबाना चाहता है।
वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे 'खुली तानाशाही' बताते हुए सवाल किया कि क्या तिरंगा फहराना अब अपराध हो गया है? उन्होंने कहा कि अभिजीत की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि मोदी सरकार युवाओं की आवाज से कितनी डरी हुई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'एकरंगा बनाम तिरंगा' की लड़ाई बताया।
आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राजधानी में भारी सुरक्षा तैनाती और सेंट्रल पार्क को बंद करने की आलोचना की। उन्होंने इसकी तुलना ब्रिटिश शासन के दौर से करते हुए कहा कि जिस तिरंगे के लिए आजादी की लड़ाई लड़ी गई, आज उसी को फहराने पर पाबंदी लगाना समझ से परे है।