LARA मनी लॉन्ड्रिंग केस: दिल्ली कोर्ट ने आरोप तय करने की प्रक्रिया टाली, लालू परिवार की हुई पेशी

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने LARA प्रोजेक्ट्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने (Framing of Charges) की प्रक्रिया को 30 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। शनिवार को हुई इस सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव कोर्ट में पेश हुए। यह मामला सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए IRCTC होटल टेंडर घोटाले से जुड़ा हुआ है।
विशेष न्यायाधीश (MP-MLA मामले) प्रशांत कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को निर्देश दिया कि वह पिछले न्यायाधीश द्वारा दिए गए निर्देशों के आलोक में जरूरी जानकारी और निर्देश प्राप्त करे। दरअसल, पूर्व न्यायाधीश विशाल गोगने ने इस मामले में आरोप तय करने का निर्देश दिया था, लेकिन औपचारिक आदेश पारित करने से पहले उनका तबादला दिल्ली उच्च न्यायालय में रजिस्ट्रार (सतर्कता) के रूप में हो गया था। इसके बाद वे द्वारका कोर्ट में तैनात हुए।
क्या है पूरा मामला और ED के आरोप?
यह पूरा विवाद IRCTC के होटल टेंडर घोटाले से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे, तब उन्होंने रांची और पुरी में रेलवे होटलों के टेंडर में गड़बड़ी की और अपने पसंदीदा बोलीदाताओं को फायदा पहुँचाया। इसके बदले में, सफल बोलीदाता ने राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम पर जमीन के टुकड़े ट्रांसफर किए।
कोर्ट ने मामले के विवरण में उल्लेख किया कि यह जमीन पहले लालू यादव के करीबी सहयोगी और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.सी. गुप्ता की कंपनी द्वारा बहुत कम कीमत पर खरीदी गई थी। इसके बाद, उस कंपनी के शेयर मामूली कीमत पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को बेच दिए गए। ईडी का दावा है कि पटना स्थित यह जमीन 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) है।
इस मामले में ईडी ने कुल 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिनमें से पूर्व न्यायाधीश ने 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था। इन आरोपियों में लालू परिवार के अलावा पी.सी. गुप्ता, सरला गुप्ता, सुजाता होटल्स, विजय कोचर और विनय कोचर शामिल हैं। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अधिवक्ता मनु मिश्रा और इनाम पेश हुए, जबकि लालू परिवार का पक्ष अधिवक्ता नवीन कुमार और वरुण जैन ने रखा।