दिल्ली यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी और NEP 2020 के खिलाफ छात्रों का भारी प्रदर्शन, KYS ने की वापसी की मांग

Kittu Kumari7 August 20262 min read44 viewsDelhi Local
दिल्ली यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी और NEP 2020 के खिलाफ छात्रों का भारी प्रदर्शन, KYS ने की वापसी की मांग

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के नॉर्थ कैंपस में 7 अगस्त 2026 को Krantikari Yuva Sangathan (KYS) और विभिन्न कॉलेजों तथा School of Open Learning (SOL) के छात्रों ने एक बड़ा Protest मार्च निकाला। इस प्रदर्शन का मुख्य मकसद हाल ही में बढ़ाई गई फीस को तुरंत वापस लेना और HEFA-NEP 2020 मॉडल को रद्द करना था।

  • DU के नॉर्थ कैंपस में छात्रों का बड़ा Protest मार्च।
  • फीस में 300% से ज्यादा की बढ़ोतरी और HEFA-NEP 2020 मॉडल को हटाने की मांग।
  • SECs और VACs को खत्म करने और सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए 10% Deprivation Points की मांग।
  • SOL के घटिया स्टडी मटीरियल को वापस लेने और Academic Audit की मांग।
  • फीस बढ़ोतरी और यूनिवर्सिटी के कारण

    कुछ कोर्सेज में फीस में 300% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई है। इसके अलावा DU की कुल संयुक्त फीस का हिस्सा 17% से ज्यादा बढ़कर ₹3,500 से ₹4,100 हो गया है, जो सालाना बढ़ोतरी को लगभग 10% तक सीमित रखने की उसकी अपनी नीति से ज्यादा है। यूनिवर्सिटी इन बदलावों की वजह बढ़ती Operational Expenses, महंगाई और Infrastructure Maintenance को बताती है।

    छात्रों की अन्य प्रमुख मांगें

    Protesters ने "बेकार" Skill Enhancement Courses (SECs) और Value Addition Courses (VACs) को खत्म करने, सिलेबस में सुधार करने और एडमिशन में सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए 10% Deprivation Points देने की मांग उठाई। इसके अलावा Sexual Harassment के खिलाफ Zero Tolerance, Internal Complaints Committees (ICCs) की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने, DU को Disabled-Inclusive बनाने के उपाय करने और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक हटाने की मांग भी की गई।

    SOL और HEFA-NEP 2020 मॉडल पर विरोध

    इस प्रदर्शन में School of Open Learning (SOL) द्वारा दिए जाने वाले Sub-standard Study Materials को वापस लेने, SOL के लिए एक स्वतंत्र Academic Audit और पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए Remedial Classes शुरू करने की मांग भी शामिल थी। विवाद का एक मुख्य बिंदु HEFA-NEP 2020 मॉडल है, जिसे Higher Education Institutions में Infrastructure Development के लिए Long-term Loans देने के वास्ते डिजाइन किया गया है। सरकारी डेटा के अनुसार, मार्च 2026 तक Centrally Funded Institutions को ₹24,977.62 करोड़ से ज्यादा बांटे जा चुके हैं (Source: PIB)। छात्रों का तर्क है कि यह मॉडल उन पर अतिरिक्त Financial Burden डालता है और Higher Education की Accessibility से समझौता करता है।

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