कृति सनोन को डीपफेक से राहत, दिल्ली हाई कोर्ट ने AI कंटेंट हटाने का दिया आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्ट्रेस कृति सनोन के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करते हुए AI-जनरेटेड डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का आदेश दिया है।

मशहूर अभिनेत्री कृति सनोन की अपनी छवि और पहचान को बचाने की कानूनी लड़ाई में बड़ी जीत हुई है। कृति सनोन डीपफेक मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट ने अभिनेत्री के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) की रक्षा करते हुए एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। जस्टिस पुरुषइंद्र कुमार कौरव ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल, खासकर AI के जरिए, बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और मध्यस्थों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे उन सभी URLs को तुरंत हटाएं या ब्लॉक करें, जिनमें कृति सनोन से जुड़े मोर्फ्ड कंटेंट और डीपफेक वीडियो मौजूद हैं। अदालत ने प्रतिवादियों को ऐसी कोई भी सामग्री बनाने, होस्ट करने या अपलोड करने से सख्ती से रोक दिया है, जो अभिनेत्री की नकल करती हो। इसमें विशेष रूप से यौन explicit सामग्री, AI-जनरेटेड डीपफेक और ऐसे चैटबॉट्स या वॉइस मॉडल्स शामिल हैं, जिन्हें जनता को गुमराह करने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा, कोर्ट ने ऐसे किसी भी मर्चेंडाइज की बिक्री या वितरण पर भी रोक लगाई है, जो गलत तरीके से यह दर्शाता हो कि वह कृति सनोन से जुड़ा है।
न्यूज रिपोर्टिंग और पैरोडी को मिली छूट
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कौरव ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े कानूनी सवाल काफी जटिल होते हैं और यह अधिकार किसी को बिना शर्त पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Injunction) नहीं देते। कोर्ट ने साफ किया कि किसी व्यक्ति की पहचान का उपयोग करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। इसी वजह से आदेश में कुछ खास छूट दी गई है।
- वैध समाचार रिपोर्टिंग और समीक्षाओं पर कोई रोक नहीं होगी।
- आलोचना, टिप्पणी, व्यंग्य (Satire) और पैरोडी को छूट दी गई है।
- फैन्स द्वारा किए गए ऐसे एक्सप्रेशन, जो प्रतिबंधित श्रेणियों में नहीं आते, उन्हें अनुमति होगी।
कृति सनोन ने यह याचिका अपने नाम, छवि, चेहरे और आवाज के अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने के लिए दायर की थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर, 2026 को होगी, जिसमें प्रतिवादियों के जवाबों के बाद केस के मेरिट पर विचार किया जाएगा।