किशनगंज-दिल्ली रूट पर कोहरे का कहर, घंटों लेट चल रही हैं ट्रेनें
कोहरे और स्मॉग के कारण किशनगंज-दिल्ली रूट पर ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं। यात्रियों को हो रही परेशानी और रेलवे की तैयारी पढ़ें।

सर्दियों की दस्तक के साथ ही उत्तर भारत में स्मॉग और घने कोहरे ने दस्तक दे दी है, जिसका सीधा असर रेल यातायात पर पड़ रहा है। खासकर किशनगंज-दिल्ली ट्रेन देरी की समस्या से यात्री काफी परेशान हैं। इस रूट पर चलने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटे पीछे चल रही हैं, जिससे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो रही है और उन्हें लंबे इंतजार के बाद अपनी मंजिल तक पहुँचने का मौका मिल रहा है।
विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होने के कारण लोको पायलटों को ट्रेन चलाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेनों की रफ्तार कम कर दी गई है, जिससे समय पर पहुँचना मुश्किल हो गया है। यात्रियों की इस असुविधा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने कुछ जरूरी कदम उठाए हैं।
सुरक्षा के लिए 'फॉग सेफ डिवाइस' का सहारा
रेलवे ने लोको पायलटों की मदद के लिए इंजनों में GPS आधारित फॉग सेफ डिवाइसेस (FSDs) लगाए हैं। ये उपकरण कम विजिबिलिटी के दौरान भी ट्रैक और सिग्नल की सटीक जानकारी देने में मदद करते हैं, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके और सफर सुरक्षित रहे।
वहीं, भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने साल 2026-2027 के सीजन के लिए भी योजना बनाना शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच नेटवर्क में होने वाली देरी को कम करने के लिए कुछ ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बदलने या चुनिंदा सेवाओं को रद्द करने पर विचार किया जा रहा है।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे स्टेशन निकलने से पहले अपनी ट्रेन की रियल-टाइम स्थिति की जांच जरूर कर लें। इसके लिए नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) या आधिकारिक रेलवे वेबसाइट का उपयोग करें, ताकि उन्हें स्टेशन पर अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।