राहुल गांधी के बयानों को सार्वजनिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना ठीक नहीं: किरण रिजिजू

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की आलोचना के बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों को सार्वजनिक क्षेत्र में प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए ताकि समाज में कोई गलत संदेश न जाए। यह विवाद The Indian Express की एक investigative report के बाद सामने आया है जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR अभ्यास से संबंधित निर्णयों पर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए कुछ निर्णयों पर आपत्ति जताई थी। किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणियों को सार्वजनिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना उचित नहीं है।
चुनाव आयोग का बचाव और विपक्षी दल की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मंत्री मनोज कुमार पांडे ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहा कि सभी तीन चुनाव आयुक्तों ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर दी है जिससे विपक्ष के आरोपों का अंत हो गया है। हालांकि, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि इन दो चुनाव आयुक्तों द्वारा 10 महीनों में लिखे गए पत्रों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि उन पत्रों में क्या था। यह घटनाक्रम राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार पर चुनाव में मैच-फिक्सिंग का आरोप लगाने के एक दिन बाद सामने आया।
विवाद और चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
राहुल गांधी ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के दावे का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि ज्ञानेंद्र कुमार ने 2016 में उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था। हालांकि, चुनाव आयोग ने SIR निर्णयों पर असहमति के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस अभ्यास से जुड़े निर्णय आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र प्रतिनियुक्ति पर एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था और इसका आयोग की किसी नीतिगत या आईटी विंग से कोई संबंध नहीं था।