नयी दिल्ली में बुधवार को इंडिया गठबंधन की बैठक शुरू हुई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) अभ्यास को वापस लेने, मतदाता सूचियों में अधिक पारदर्शिता लाने और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतपत्र जनता का है। खड़गे ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य के सिद्धांत पर बनी है और आज इस सिद्धांत को गंभीर खतरा है। देश भर में नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर चिंता जता रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों यानी ईवीएम, मतदाता सूची में हेरफेर और चुनावी रोल में बदलाव पर उठाए गए सवालों के पर्याप्त जवाब नहीं मिले हैं। उन्होंने महादेवपुरा, आलैंड, हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनावी सूची से जुड़े कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का भी जिक्र किया। एसआईआर पर बोलते हुए खड़गे ने कहा कि यह अभ्यास चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को साफ और अपडेट करने के लिए था, लेकिन इससे असली मतदाताओं के बाहर होने का खतरा हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि मतदाता सूची से 13.3 करोड़ मतदाताओं को स्पष्ट रूप से हटा दिया गया है। लोकतंत्र में हिस्सा लेने की उनकी ताकत छीन ली गई है। खड़गे ने मांग की कि भविष्य के चुनावों के लिए प्री-एसआईआर मतदाता सूची का उपयोग किया जाए और नाम जोड़ने, हटाने तथा सुधार करने में पूरी पारदर्शिता हो।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना करते हुए कहा कि वह पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हमारे मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह बेनकाब हैं, उनके दो साथी सदस्यों ने 10 महीने में 14 बार पत्र लिखे हैं जो उनकी अखंडता और मंशा पर सवाल उठाता है। इसलिए उन्हें उनके पद से हटाया जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने पहली बार के मतदाताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग की और आरोप लगाया कि फॉर्म 6 में बदलाव युवा मतदाताओं के लिए बाधाएं पैदा कर रहे हैं। ईवीएम पर खड़गे ने कहा कि इंडिया गठबंधन का रुख बैलेट मतदान पर लौटने का होना चाहिए क्योंकि मतपत्र और जनादेश जनता का होता है।
इस बीच, कांग्रेस नेता
जैरम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि इंडिया गठबंधन की पार्टियां मोदी सरकार के लगातार हमलों से भारत के संविधान की रक्षा के प्रयासों में एकजुट हैं। इस बैठक में कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस, राकांपा (शरद पवार), शिवसेना (यूबीटी), राजद, माकपा, भाकपा, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, झामुमो, भाकपा-माले, आईयूएमएल, केरल कांग्रेस (एम), एमडीएमके, विदुथलाई चिरूथैगल काची, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, केरल कांग्रेस (जैकोबाइट) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक शामिल हुए।