मल्लिकार्जुन खड़गे ने की एसआईआर को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

Kittu Kumari30 September 20263 min read1 viewNational
मल्लिकार्जुन खड़गे ने की एसआईआर को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

नयी दिल्ली में बुधवार को इंडिया गठबंधन की बैठक शुरू हुई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास को वापस लेने, मतदाता सूचियों में अधिक पारदर्शिता लाने और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतपत्र जनता का है। खड़गे ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' के सिद्धांत पर बनी है और यह सिद्धांत एक गंभीर खतरे का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश भर में नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं उठा रहे हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम), मतदाता सूची में हेरफेर और चुनावी रोल में बदलाव को लेकर उठाए गए सवालों के पर्याप्त जवाब नहीं मिले हैं। उन्होंने महादेवपुरा, आलैंड, हरियाणा और महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का भी जिक्र किया। एसआईआर पर बोलते हुए खड़गे ने कहा कि यह अभ्यास चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को साफ और अद्यतन करने के लिए था, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि इससे वास्तविक मतदाताओं को बाहर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि मतदाता सूची से 13.3 करोड़ मतदाताओं को खुलेआम हटा दिया गया है। लोकतंत्र में भाग लेने की उनकी शक्ति छीन ली गई है। खड़गे ने मांग की कि भविष्य के चुनावों के लिए एसआईआर से पहले की मतदाता सूची का उपयोग किया जाए और नाम जोड़ने, हटाने तथा सुधार करने में पूरी पारदर्शिता हो। उन्होंने वैध मतदाताओं को हटाने से पहले पूर्व सूचना, कारण और एक प्रभावी अपील तंत्र की भी मांग की। संस्थागत जवाबदेही की मांग करते हुए खड़गे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 में परिकल्पित एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग के बिना कोई भी विश्वसनीय चुनाव नहीं हो सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानवेश कुमार की भी आलोचना करते हुए कहा कि वे बेनकाब हो चुके हैं और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हमारे मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। उनके दो साथी सदस्यों ने 10 महीने में 14 बार पत्र लिखा है। यह उनकी अखंडता और मंशा पर सवाल उठाता है। इसलिए उन्हें उनके पद से हटाया जाना चाहिए। यदि उनमें संवैधानिक या नैतिक शर्म का एक भी अंश बचा है, तो वे खुद इस्तीफा दे देंगे और उन शक्तियों के खिलाफ सरकारी गवाह बन जाएंगे जो हमारी मतदाता सूचियों में हस्तक्षेप कर रही हैं। उन्होंने पहली बार मतदान करने वालों के लिए आसान मतदाता पंजीकरण प्रक्रियाओं की भी मांग की और आरोप लगाया कि फॉर्म 6 में बदलाव युवा मतदाताओं के लिए बाधाएं पैदा कर रहे हैं। ईवीएम पर खड़गे ने कहा कि इंडिया गठबंधन की स्थिति बैलेट वोटिंग पर वापस लौटने की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मतपत्र जनता का है। जनादेश जनता का है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि हम पारदर्शिता की जगह गोपनीयता नहीं आने देंगे। और हम अपने गणराज्य के मौलिक सिद्धांत यानी एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य को कमजोर नहीं होने देंगे। इस बीच, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि इंडिया गठबंधन की पार्टियां संविधान की रक्षा के अपने प्रयासों में एकजुट हैं। आर रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भाग लेने वाली पार्टियां मोदी सरकार के बार-बार होने वाले हमलों से भारत के संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हैं - हाल ही में सत्ता में बने रहने के लिए ईसीआई के माध्यम से उनका वोट चोरी का खेलप्लान सामने आया है। बैठक में भाग लेने वाली पार्टियां कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस, राकांपा (शरद पवार), शिवसेना (यूबीटी), राजद,कमीनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), सीपीआई, जेकेएनसी, जेकेपीडीपी, झामुमो, सीपीआई-एमएल, आईयूएमएल, केसी (एम), एमडीएमके, वीसीके, आरएसपी, केसी (जे) और एआईएफबी हैं।

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel
Share:

Comments

Leave a comment