दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का असर: खान मार्केट के व्यापारियों ने जताया भारी नुकसान, SC से लगाई गुहार

देश की राजधानी दिल्ली के सबसे पॉश और व्यस्त व्यावसायिक केंद्रों में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। खान मार्केट व्यापारिक नुकसान की बात करते हुए व्यापारियों ने बताया कि उनकी कमाई सामान्य स्तर से गिरकर महज 10 से 20 प्रतिशत रह गई है, यानी करीब 80-90% राजस्व का भारी नुकसान हुआ है।
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष बृजगोपाल खोसला ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से औपचारिक अपील की है कि प्रदर्शनों को शहर की सीमाओं के बाहर स्थानांतरित किया जाए, ताकि आम जनता और ग्राहकों की पहुंच बाधित न हो और लोगों की रोजी-रोटी पर संकट न आए।
2000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान और कानूनी लड़ाई
व्यापारिक जगत में इस संकट की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने अब तक कुल 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है। CTI ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि शहर की सीमा के बाहर एक स्थायी और निर्धारित 'विरोध क्षेत्र' बनाया जाए, ताकि व्यावसायिक गतिविधियों और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे।
दूसरी ओर, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए दो याचिकाओं पर सुनवाई करने की सहमति दी है। इन याचिकाओं का उद्देश्य व्यावसायिक केंद्रों के पास होने वाले सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करना है, ताकि भविष्य में ऐसी अव्यवस्था न हो।
सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में तीन स्तर की बैरिकेडिंग की है। 12 अक्टूबर को हुए विपक्ष के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के उल्लंघन के आरोप में कई FIR दर्ज की हैं।
इसी बीच, राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनावी रोल संशोधन को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका में 14 कमियां (defects) पाई हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने प्रतिनिधिमंडल को निर्देश दिया है कि वे अपनी शिकायतों को स्थापित कानूनी माध्यमों के जरिए ही आगे बढ़ाएं।