खान मार्केट में चुनावी रोल संशोधन के प्रदर्शन से व्यापार ठप, व्यापारियों ने मांगी मदद

दिल्ली का मशहूर खान मार्केट इन दिनों सन्नाटे और तनाव की चपेट में है। चुनावी रोल के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने यहां के कारोबार को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। व्यापारियों का कहना है कि लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण ग्राहकों का बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बृजगोपाल खोसला ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों के कारण मार्केट के रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, जिससे ग्राहक आने से कतरा रहे हैं। खोसला ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और विरोध प्रदर्शनों के लिए किसी ऐसी जगह का निर्देश दे जो दिल्ली की सीमा पर हो, ताकि स्थानीय दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और हुड़दंग जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं।
क्या है विवाद और प्रदर्शन की वजह?
यह पूरा विवाद 2 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनावी रोल के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, जिससे कुल संख्या 98 करोड़ रह गई है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि इससे बड़ी संख्या में लोग अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
इस आंदोलन में AISA-RYA, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और INDIA गठबंधन के सदस्य शामिल हैं। उनकी मुख्य मांगें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया की वापसी और बिहार व पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को रद्द करना है।
इस तनाव को देखते हुए गृह मंत्रालय ने दिल्ली में 20,000 अर्धसैनिक बलों की तैनाती को चार और हफ्तों के लिए बढ़ा दिया है। दिल्ली पुलिस ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, जिसमें धारा 163 लागू करना और कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद करना शामिल है। गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसी बड़ी राजनीतिक हस्तियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। यह विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने इस प्रक्रिया का विरोध किया है।