केरिंग जनरेशन अवार्ड की भारत में शुरुआत, सस्टेनेबिलिटी के तीन इनोवेटर्स सम्मानित

Kittu Kumari13 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
केरिंग जनरेशन अवार्ड की भारत में शुरुआत, सस्टेनेबिलिटी के तीन इनोवेटर्स सम्मानित

फैशन और लग्जरी की दुनिया में सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) को बढ़ावा देने के लिए मशहूर 'केरिंग जनरेशन अवार्ड' ने पहली बार भारत में कदम रखा है। नई दिल्ली स्थित फ्रांस दूतावास में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान, पर्यावरण और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए नए समाधान खोजने वाले तीन भारतीय इनोवेटर्स को सम्मानित किया गया। इस प्रतियोगिता में पाईवंड स्टूडियो (Paiwand Studio), विदाउट (Without) और ए ब्लंट स्टोरी (A Blunt Story) विजेताओं के रूप में उभरे हैं।

अवार्ड जीतने वालों में पाईवंड स्टूडियो की अशिता सिंघल, विदाउट के अनिश मालपानी और ए ब्लंट स्टोरी की चांदनी बत्रा शामिल हैं। इन तीनों ने मटेरियल, टेक्सटाइल और फैशन के क्षेत्र में ऐसे इनोवेटिव समाधान विकसित किए हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सकें।

भारत की प्रतिभा और फ्रांस का सहयोग

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथौ ने कहा कि भारत में इस अवार्ड की शुरुआत एक बड़ा मील का पत्थर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत न केवल फैशन और लग्जरी के लिए एक बड़ा बाजार है, बल्कि यह प्रतिभा और उद्यमी ऊर्जा का केंद्र भी है। माथौ के अनुसार, फ्रांस और भारत के बीच शिल्प कौशल (craftsmanship) और डिजाइन का गहरा रिश्ता रहा है, और अब समय है कि दोनों देश मिलकर फैशन उद्योग की पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करें।

उन्होंने यह भी बताया कि 'इंडियन-फ्रेंच ईयर ऑफ इनोवेशन 2026' के हिस्से के रूप में फ्रांस दूतावास इस तरह की पहलों को प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने विला स्वागतम जैसे नेटवर्क और 'टेक्सटाइल मैटर्स' जैसी प्रदर्शनियों का जिक्र किया, जो दोनों देशों के बीच रचनात्मक संबंधों को मजबूत कर रही हैं।

केरिंग की चीफ सस्टेनेबिलिटी और इंस्टीट्यूशनल अफेयर्स ऑफिसर मैरी-क्लेयर डेव्यू ने कहा कि अगर उद्योग के मौजूदा तौर-तरीकों को बदलना है, तो इनोवेशन ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने भारत के सस्टेनेबिलिटी इकोसिस्टम और विरासत की तारीफ करते हुए कहा कि भविष्य के स्टार्टअप्स की पहचान करने के लिए इस अवार्ड को भारत लाना एक स्वाभाविक फैसला था।

विजेताओं में से एक अशिता सिंघल, जिन्होंने नोएडा में अपना पाईवंड स्टूडियो शुरू किया, ने बताया कि उनका काम पारंपरिक हथकरघा बुनाई के साथ टेक्सटाइल कचरे को जोड़कर नए सर्कुलर मटेरियल तैयार करना है। उन्होंने साझा किया कि 2018 में पढ़ाई के दौरान फैशन इंडस्ट्री से होने वाले प्रदूषण और कचरे को देखकर उन्होंने यह पहल की, ताकि धरती पर बोझ बढ़ाए बिना बेकार कपड़ों से कुछ उपयोगी बनाया जा सके।

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