केजरीवाल का केंद्र पर हमला: अमेरिकी दबाव में जनता को नजरअंदाज कर रही है सरकार, E20 नीति वापस लेने की मांग

Kittu Kumari7 August 20262 min read28 viewsNational
केजरीवाल का केंद्र पर हमला: अमेरिकी दबाव में जनता को नजरअंदाज कर रही है सरकार, E20 नीति वापस लेने की मांग

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को केंद्र सरकार की E20 नीति को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है और अमेरिका के दबाव में आकर इस नीति को लागू कर रही है।

  • अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को पार्टी कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।
  • E20 नीति के विरोध में 2,33,238 हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपने के लिए एक महीने पहले प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा गया था, लेकिन कोई अपॉइंटमेंट नहीं दिया गया।
  • आज जब वह और अन्य लोग याचिकाओं के साथ प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, तब भी उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
  • केजरीवाल ने बताया कि पंजाब में AAP सरकार पहले ही E20 वापस लेने का प्रस्ताव पास कर चुकी है और गोवा, गुजरात तथा जम्मू-कश्मीर के विधायक भी ऐसे प्रस्ताव लाएंगे।
  • संसद में दिए गए बयानों का उठाया मुद्दा

    पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले संसद में खुद स्वीकार किया था कि E20 से गाड़ियों का माइलेज कम होता है और यह इंजन के कुछ रबर पार्ट्स को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह नुकसान सामने है, तो फिर इस नीति को जबरन क्यों लागू किया जा रहा है?

    अमेरिका से एथेनॉल खरीदने और विदेशी दबाव का आरोप

    केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी दबाव के कारण भारत को अमेरिका से एथेनॉल खरीदने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बाहरी प्रभाव के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाए और E20 नीति को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पंजाब की AAP सरकार इस नीति को वापस लेने का प्रस्ताव पहले ही पास कर चुकी है और गोवा, गुजरात तथा जम्मू-कश्मीर के पार्टी विधायक भी ऐसे ही प्रस्ताव पेश करेंगे।

    बड़े जन आंदोलन का आह्वान

    इस मुद्दे पर एक बड़े जन आंदोलन का आह्वान करते हुए केजरीवाल ने इस बात पर जोर दिया कि यदि नागरिक E20 से राहत चाहते हैं, तो उन्हें सड़कों पर उतरना होगा। उन्होंने मौजूदा माहौल में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की कठिनाई को भी स्वीकार किया। उन्होंने अपने इस आरोप को दोहराया कि विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों को लाभ पहुंचाने के दावों के विपरीत, सरकार वास्तव में अमेरिका से एथेनॉल आयात करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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