केजरीवाल ने E20 फ्यूल की सेफ्टी पर उठाए गंभीर सवाल, सरकार पर SIAM पर दबाव डालने का लगाया आरोप

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को केंद्र सरकार की E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए उन्होंने दावा किया कि Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि ज्यादा क्लोराइड और नमी के कारण E20 फ्यूल वाहनों को नुकसान पहुंचा सकता है।
SIAM की रिपोर्ट और सरकारी नियम
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने SIAM पर इस रिपोर्ट को वापस लेने के लिए दबाव डाला था। प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार, SIAM ने पहले पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को E20 में अत्यधिक क्लोराइड और नमी से वाहन के पुर्जों को नुकसान पहुंचने की संभावना के बारे में चिंता जताई थी। हालांकि, 5 अगस्त 2026 को SIAM ने यह कम्युनिकेशन वापस ले लिया और स्पष्ट किया कि यह चल रही तकनीकी चर्चाओं का हिस्सा था। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने देश भर में 1 अप्रैल 2026 से 20% इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) की बिक्री अनिवार्य कर दी है।
सरकार का पक्ष और E20 के फायदे
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सभी ब्लेंडेड इथेनॉल में क्लोराइड/सल्फर के लिए 3 पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm) का एहतियाती दिशानिर्देश तय किया है। सरकार का कहना है कि E20 वैज्ञानिक रूप से परीक्षण किया हुआ, सुरक्षित और राष्ट्रीय हित में है। इससे विदेशी मुद्रा में 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत होती है और कच्चे तेल के आयात में 316 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा की कमी आती है। सरकार ने यह भी माना है कि कुछ E10-कंपैटिबल वाहनों में E20 से फ्यूल एफिशिएंसी में 3-5% की कमी आ सकती है।
केजरीवाल की मांगें और आरोप
केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग चिंताएं बनी हुई हैं, तो सरकार E20 को देश भर में लागू करने के लिए क्यों जोर दे रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर अमेरिका के दबाव में अमेरिकी इथेनॉल की खरीद बढ़ाने के लिए E20 को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को रेगुलर पेट्रोल और E20 के बीच चुनने का विकल्प दिया जाए, E20 को रेगुलर पेट्रोल से कम कीमत पर बेचा जाए और E20 की सुरक्षा पर सरकार के अध्ययन को सार्वजनिक किया जाए।