कश्मीरी गेट पर दिल्ली की सबसे पुरानी दुर्गा पूजा की धूम, 117 साल से बरकरार है परंपरा

Kittu Kumari17 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
कश्मीरी गेट पर दिल्ली की सबसे पुरानी दुर्गा पूजा की धूम, 117 साल से बरकरार है परंपरा

राजधानी दिल्ली में उत्सव का माहौल है और इस बार कश्मीरी गेट की ऐतिहासिक दुर्गा पूजा अपने 117वें वर्ष का जश्न मना रही है। अलीपुर रोड स्थित बंगाली सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दिल्ली दुर्गा पूजा चैरिटेबल एंड कल्चरल समिति द्वारा आयोजित यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सदी पुरानी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है। जहाँ आज के दौर में कई पंडाल आधुनिक थीम और तड़क-भड़क वाले डिजाइनों पर जोर देते हैं, वहीं कश्मीरी गेट की यह पूजा अपनी सादगी और शास्त्रीय परंपराओं के लिए जानी जाती है।

'एक चला' मूर्ति और 'डाकेर साज' की अनोखी परंपरा

इस पूजा की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ की 'एक चला' मूर्ति है। इस पारंपरिक डिजाइन में सभी देवी-देवताओं को एक ही फ्रेम या ढांचे पर स्थापित किया जाता है, जो 1912 से इस समिति की पहचान बनी हुई है। इसके अलावा, मूर्ति की सुंदरता को 'डाकेर साज' यानी पारंपरिक चांदी के वर्क (सिल्वर फॉयल) की सजावट से निखारा गया है। यह विशेष साज-सज्जा 1910 में इस पूजा की शुरुआत के समय से ही चली आ रही है, जो इसे दिल्ली की अन्य पूजाओं से अलग और खास बनाती है।

वर्ष 2026 के लिए इस उत्सव का आयोजन गुरुवार, 15 अक्टूबर से शुरू होकर बुधवार, 21 अक्टूबर तक किया जा रहा है। उत्सव के कार्यक्रम के अनुसार, 16 अक्टूबर को महा षष्ठी का आयोजन हुआ, जबकि 19 अक्टूबर को महा अष्टमी, 20 अक्टूबर को महा नवमी और 21 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ इस भव्य आयोजन का समापन होगा।

वर्तमान में, बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। लोग न केवल माँ दुर्गा का आशीर्वाद लेने आ रहे हैं, बल्कि उस विरासत और रीति-रिवाजों को करीब से देखने भी उत्सुक हैं, जिन्होंने इस आयोजन को राजधानी की सबसे पुरानी दुर्गा पूजा के रूप में जीवित रखा है।

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