करवा चौथ: दिल्ली-NCR में बादलों ने बढ़ाई मुश्किल, चांद न दिखने पर ऐसे खोलें व्रत
दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में बादलों और बारिश की वजह से करवा चौथ का चांद नजर नहीं आ रहा है। जानें व्रत खोलने के वैकल्पिक तरीके।

दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में आज करवा चौथ के मौके पर सुहागिंस के लिए इंतजार लंबा खिंच गया है। आसमान में छाए घने बादलों और रुक-रुक कर हो रही बारिश की वजह से करवा चौथ चांद नजर नहीं आ रहा है, जिससे व्रत खोलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, आंध्र प्रदेश और यनम तट से गुजरे चक्रवात 'अर्नब' के असर के कारण पूरे नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के मौसम में बदलाव आया है, जिससे विजिबिलिटी कम हो गई है।
खगोलीय गणना के अनुसार, नई दिल्ली में चांद निकलने का समय रात 8:17 बजे, नोएडा में 8:16 बजे और गुरुग्राम में 8:18 बजे तय था। हालांकि, खराब मौसम की वजह से महिलाएं काफी देर से चांद का इंतजार कर रही हैं। चतुर्थी तिथि आज रात 10:09 बजे समाप्त होगी, जिससे पहले व्रत खोलना अनिवार्य है।
अगर न दिखे चांद, तो इन तरीकों से पूरा करें रस्म
धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बादल नहीं छंटते और चांद दिखाई नहीं देता, तो घबराने की जरूरत नहीं है। परंपराओं के अनुसार कुछ वैकल्पिक तरीकों से भी व्रत संपन्न किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि निर्धारित समय के बाद 30 से 45 मिनट तक इंतजार करें। यदि फिर भी चांद न दिखे, तो निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- अर्घ्य देना: पूर्व दिशा की ओर मुख करके पानी, कच्चा दूध, चावल के दाने और सफेद फूलों से अर्घ्य दें।
- भगवान शिव के दर्शन: चूंकि भगवान शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है, इसलिए उनकी प्रतिमा या तस्वीर के दर्शन कर व्रत खोला जा सकता है।
- प्रतीकात्मक चांद: सफेद चंदन, कच्चे चावल और फूलों की मदद से एक प्रतीकात्मक चांद बनाकर उसकी पूजा की जा सकती है।
- चांदी का उपयोग: एक कटोरे पानी में चांदी का सिक्का या चांदी का गोल टुकड़ा रखकर उसे चांद मानकर पूजा की जा सकती है।
इसके साथ ही, 'ॐ सोम् सोमाय नमः' मंत्र का 11 या 21 बार जाप करने और गणेश जी व करवा माता की प्रार्थना करने की सलाह दी गई है। हालांकि, जानकारों ने स्पष्ट किया है कि वीडियो कॉल या फोटो के जरिए चांद देखने की डिजिटल पद्धति को मान्यता नहीं दी गई है। महिलाओं को सलाह दी गई है कि वे अपने परिवार के बड़ों या पंडितों से परामर्श कर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार ही निर्णय लें।