'वेलकम टू इंडिया एलोन', राहुल गांधी के मस्क वाले तंज पर कार्ति चिदंबरम ने समझाया असली मतलब

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और स्पेसएक्स (SpaceX) के सीईओ एलोन मस्क के बीच सोशल मीडिया पर हुई एक छोटी सी बातचीत अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है। इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता और सांसद कार्ति चिदंबरम ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी की टिप्पणी महज एक मजाक नहीं थी, बल्कि उसके जरिए केंद्र सरकार द्वारा बढ़ावाए जा रहे 'कॉर्पोरेट एकाधिकार' (Monopoly) पर एक गहरा और तीखा कटाक्ष किया गया था।
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एलोन मस्क ने स्टारलिंक (Starlink) को भारतीय बाजार में लाने में आ रही दिक्कतों पर निराशा जताई। मस्क ने दावा किया कि पांच साल तक सभी नियमों का पालन करने के बावजूद उन्हें लाइसेंस नहीं मिल पा रहा है, जो कि काफी परेशान करने वाली बात है। इस पर राहुल गांधी ने मस्क को जवाब देते हुए लिखा, "भारत में आपका स्वागत है, एलोन। बस तब तक इंतजार कीजिए जब तक आप 'दूसरे शख्स' को नहीं जान लेते।" मस्क ने इसके जवाब में लिखा, "शुक्रिया राहुल, यह वाकई परेशान करने वाला है।"
कॉर्पोरेट एकाधिकार पर था राहुल गांधी का निशाना
कार्ति चिदंबरम ने एएनआई (ANI) से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी की यह टिप्पणी बहुत सूक्ष्म और व्यंग्य से भरी थी, जिसे शायद कई लोग समझ नहीं पाए। चिदंबरम के अनुसार, जब मस्क ने एक खास कारोबारी का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या वह भारत का असली मालिक है, तब राहुल गांधी ने संकेत दिया कि भारत में एक और ऐसा बड़ा कारोबारी समूह है, जिसका सरकार की नीतियों पर बहुत गहरा प्रभाव है।
चिदंबरम ने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी का यह बयान एलोन मस्क या उनकी कंपनी स्टारलिंक का समर्थन नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी केवल यह बताना चाहते थे कि भारत के कई महत्वपूर्ण सेक्टर अब 'मोनोपॉली' या 'डुओपॉली' (दो कंपनियों का कब्जा) बन चुके हैं, जो भारतीय व्यापारिक माहौल के लिए अच्छा नहीं है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि देश के कुछ बड़े बिजनेस घराने अंतरराष्ट्रीय पूंजी का इस्तेमाल कर रहे हैं और घरेलू संरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। चिदंबरम ने कहा कि ये 'ओलिगार्क्स' (अल्पतंत्र) भले ही भारतीय नागरिकता के तौर पर दिखें, लेकिन उनकी ओनरशिप स्ट्रक्चर और इक्विटी के बारे में पूरी सच्चाई स्पष्ट नहीं है।
दूसरी ओर, संचार मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए भारत की नियामक नीतियां पूरी तरह निष्पक्ष हैं और इनमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।